किसानों के लिये राहत पैकेज पर विशेषज्ञों ने दी मिश्रित प्रतिक्रिया
भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के प्रवक्ता धर्मराज मलिक ने एक बयान में कहा, "फसल ऋण की किस्तें चुकाने में राहत को और बढ़ाने तथा अधिक किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) प्रदान करने के अलावा किसान समुदाय के लिये कोई बड़ा आर्थिक पैकेज घोषित नहीं किया गया है।"
नयी दिल्ली, 14 मई कृषि क्षेत्र के विशेषज्ञों और संगठनों ने कोरोना वायरस महामारी के जारी संकट के दौरान बिना बाधा के कृषि कार्य में किसानों की मदद के लिये बृहस्पतिवार को घोषित प्रोत्साहन पैकेज की दूसरी किस्त में किये गये उपायों पर मिश्रित प्रतिक्रिया दी।
भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के प्रवक्ता धर्मराज मलिक ने एक बयान में कहा, "फसल ऋण की किस्तें चुकाने में राहत को और बढ़ाने तथा अधिक किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) प्रदान करने के अलावा किसान समुदाय के लिये कोई बड़ा आर्थिक पैकेज घोषित नहीं किया गया है।"
उन्होंने कहा कि इन उपायों से किसानों को आत्मनिर्भर होने में मदद नहीं मिलेगी, "इसके बजाय वे आत्महत्या करने के लिये मजबूर होंगे।" उन्होंने कहा कि किसान खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं।
ट्रैक्टर एंड मैकेनाइजेशन एसोसिएशन के अध्यक्ष टी आर केशवन ने कहा, "कृषि मूल्य श्रृंखला पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है और फार्म मशीनीकरण उद्योग के साथ इसे देश में आवश्यक सेवा माना जाना चाहिये।"
उन्होंने कहा कि भारत जैसे बड़े और अधिक आबादी वाले देश के लिये कृषि महत्वपूर्ण है। यह खाद्य सुरक्षा के लिये आत्मनिर्भरता को लेकर भी महत्वपूर्ण है।
उन्होंने भविष्य में सरकार से और उपायों की अपेक्षा जाहिर की।
हालांकि फिक्की तथा अन्य उद्योग मंडलों और संगठनों , पीडब्ल्यूसी इंडिया, काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर (सीईईवी) आदि ने फैसलों की सराहना करते हुए कहा कि यह किसानों को बड़ा समर्थन प्रदान करेगा।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, लेटेस्टली स्टाफ ने इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया है)