देश की खबरें | विशेषज्ञ और पेशेवर स्वास्थ्यकर्मियों ने कोविड-19 को हराने में भारत की मदद की : मांडविया

नयी दिल्ली, चार मार्च केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने शनिवार को कहा कि भारतीय वैज्ञानिक समुदाय में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विश्वास और देश भर के प्रतिष्ठित स्वास्थ्य पेशेवरों ने भारत को महामारी के दौरान ‘‘असाध्य चुनौतियों’’ पर विजय प्राप्त करने में मदद की।

उन्होंने कहा कि ऐसे वक्त में जब दूसरे देशों में टीकाकरण को लेकर झिझक की स्थिति थी, भारत ने कोविड प्रबंधन में टीकाकरण के उपयोग का उदाहरण पेश किया।

मांडविया प्रगति मैदान में चल रहे ‘विश्व पुस्तक मेला’ में वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग के अवर सचिव सज्जन सिंह यादव की पुस्तक ‘इंडियाज वैक्सीन ग्रोथ स्टोरी- फ्रॉम काउपॉक्स टू वैक्सीन मैत्री’ के विमोचन के अवसर पर उक्त बातें कहीं।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, ‘‘भारतीय वैज्ञानिक समुदाय में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विश्वास और देश भर के प्रतिष्ठित स्वास्थ्य पेशेवरों ने भारत को महामारी के दौरान असाध्य चुनौतियों पर विजय प्राप्त करने में मदद की मुश्किल चुनौतियों का सामना करने और ऐसा मकाम हासिल करने में मदद की, जो पहले किसी ने नहीं किया था। उन्होंने ना सिर्फ अपने देश का भला किया बल्कि समय रहते ही दुनिया भर को जीवन रक्षक दवाओं की आपूर्ति भी की।’’

स्वास्थ्य कर्मियों की दृढ़ प्रतिबद्धता की प्रशंसा करते हुए मांडविया ने कहा, ‘‘भारत ने दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण कार्यक्रम के लिए देशभर में बिना किसी कमी के (कोविड रोधी टीके की) 2.2 अरब खुराकें दीं, जिससे 34 लाख लोगों के जीवन की रक्षा हुई।’’

उन्होंने लेखकों से शोध आधारित दस्तावेजों पर लिखने को कहा जिससे भारत की भुला दी गई समृद्ध परंपराओं और संस्कृति को फिर से सामने आने का मौका मिलेगा।

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे यह देखकर बहुत खुशी हो रही है कि अनुसंधान, निर्माण और टीकाकरण अभियान को तमाम सकारात्मक तरीकों से पेश किया गया है, जो ना सिर्फ महामारी के बारे में बातें करता है बल्कि टीके के इतिहास पर भी प्रकाश डालता है जो करीब 2,500 साल पुराना है।’’

मांडविया ने कहा, ‘‘शोध आधारित दस्तावेज भारत की विरासत को सामने लाने का माध्यम हैं जो दुनिया को संभावनाओं और समाधान से वाकिफ कराते हैं, जैसा कि भारत ने कोविड-19 प्रबंधन में किया है। हमने अपनी परंपराओं और संस्कृति से जुड़ कर इसका मुकाबला किया।’’

अभिवादन करने के हमारे पारंपरिक तरीके ‘हाथ जोड़कर नमस्ते कहने’ का उदाहरण देते हुए मांडविया ने कहा कि भारत की विरासत अपने ज्ञान और विज्ञान को दर्शाती है जो संकट की घड़ी में सही साबित हुई हैं।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)