देश की खबरें | सेना के सेवानिवृत्त कर्नल ने लगायी कलाकृतियों की प्रदर्शनी
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चंडीगढ़, 26 मई सेना के एक सेवानिवृत्त कर्नल (80) ने ‘ड्रिफ्टवुड’ से बनी कलाकृतियों की एक प्रदर्शनी लगाई है, जिन्हें उन्होंने स्वयं बनाया है।
कर्नल जसपाल सिंह चंदोक (सेवानिवृत्त) ने कहा कि वह कम उम्र से ही कला की ओर आकर्षित थे और सेना में उनकी लगातार बदलती तैनाती के कारण उनमें प्रकृति के प्रति आकर्षण बना रहा।
उनकी प्रदर्शनी का उद्घाटन चंडीगढ़ की महापौर हरप्रीत कौर बबला ने 23 मई को यहां उनके घर पर किया। यह 29 मई तक प्रदर्शित रहेगी।
‘ड्रिफ्टवुड’ वह लकड़ी होती है जो ज्वार या लहरों के कारण बहकर समुद्र, झील या नदी के किनारे पर आ जाती है।
पूर्व सैन्य अधिकारी ने बताया कि समय बीतने के साथ ही उन्होंने प्राकृतिक रूप से बहकर आने वाली लकड़ी के टुकड़ों को पहचानने तथा उन्हें हिरण, नर्तकी, लैंप शेड और यहां तक कि डायनासोर की आकृति देने की क्षमता विकसित कर ली थी।
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने बहकर आयी कुछ लकड़ियों के टुकड़े तब इकट्ठा किए थे जब मैं सेवा में था और कई सेवानिवृत्ति के बाद जमा किए।’’
हालांकि, कर्नल चंदोक ने अपने कुछ शिल्प ऐसे टुकड़ों से भी बनाए हैं जो गिरे हुए पेड़ों की शाखाओं या जड़ों से एकत्र किए गए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मैं पेड़ों की जड़ों का भी उपयोग करता हूं ताकि ऐसा शिल्प बना सकूं जिसमें सौंदर्य के साथ-साथ उपयोगिता भी हो।’’
कर्नल चंदोक ने अपने करियर के बारे में बताया कि उनकी सबसे प्रतिष्ठित नियुक्ति राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए), पुणे में प्रशिक्षक के रूप में रही। उन्होंने कहा कि अपने कार्यकाल के दौरान, जब वह जूलियट स्क्वाड्रन के कमांडर थे, तब कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी उनके कैडेट रहे, जिनमें सेना के तीनों अंगों के वर्तमान और पूर्व प्रमुख भी शामिल हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे इस बात पर बहुत गर्व है कि वर्तमान प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान तथा एयर चीफ मार्शल वी. आर. चौधरी और एडमिरल हरि कुमार (दोनों पिछले वर्ष सेवा से सेवानिवृत्त हुए) ये तीनों मेरे कैडेट थे जब मैं स्क्वाड्रन कमांडर था। 1978-79 में जब मैं प्रशिक्षक था, ये सभी मेरे कैडेट थे। मुझे इस बात पर गर्व है कि उनके प्रशिक्षण के प्रारंभिक चरण में मैं उनका मार्गदर्शन कर सका।’’
कर्नल चंदोक ने बताया कि उन्होंने अब तक 35 देशों की यात्रा की है और दुनिया भर से 250 से अधिक स्मृति-चिह्न (सुवेनियर) एकत्र किए हैं, जिन्हें उन्होंने एक ‘मिनी म्यूजियम’ में बड़े गर्व से संजोकर रखा है।
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