बड़ी कंपनियां भी जलवायु बचाने में नहीं कर रहीं पर्याप्त मदद
एक नई रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर की दर्जनों बड़ी कंपनियां जलवायु परिवर्तन को रोकने में अपनी भूमिका को गंभीरता से नहीं निभा रही हैं.
एक नई रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर की दर्जनों बड़ी कंपनियां जलवायु परिवर्तन को रोकने में अपनी भूमिका को गंभीरता से नहीं निभा रही हैं. ये कंपनियां अपने ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को पर्याप्त तेजी से कम नहीं कर रही हैं.गैर-लाभकारी शोध समूह 'न्यूक्लाइमेट इंस्टिट्यूट' और 'कार्बन मार्किट वॉच' ने इस रिपोर्ट के लिए गाड़ियों के उत्पादकों से लेकर फास्ट फैशन वाली 51 बहुराष्ट्रीय कंपनियों का अध्ययन किया. अध्ययन में पाया गया कि ये कंपनियां जलवायु परिवर्तन को धीमा करने के लिए आवश्यक गति से अपने ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम नहीं कर रही हैं.
कई कंपनियां तो सस्टेनेबिलिटी को बढ़ावा देने के अपने वादों को बढ़ा चढ़ा कर बता रही हैं. एचएंडएम, नेस्ले और टोयोटा जैसी जानी मानी कंपनियां इस सूची में शामिल हैं. कुल मिलाकर यह 51 कंपनियां 2022 में 16 प्रतिशत वैश्विक उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार थीं.
लक्ष्य से 10 प्रतिशत पीछे
लेकिन रिपोर्ट में कहा गया है कि 2015 के पेरिस समझौते के तहत वैश्विक तापमान को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक रोक कर रखने में इनकी कोशिशें "गंभीर रूप से अपर्याप्त" हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक, हालांकि "2030 के जलवायु संकल्पों को लेकर कंपनियों की सामूहिक महत्वाकांक्षा में पिछले दो सालों में धीरे-धीरे सुधार हुआ है...अधिकांश कंपनियां अभी भी उत्सर्जन में उतनी कमी नहीं कर पा रही हैं जितनी जरूरत है."
संयुक्त राष्ट्र के जलवायु वैज्ञानिकों के मुताबिक पेरिस समझौते के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए वैश्विक उत्सर्जन को 2030 तक 43 प्रतिशत घटाने की जरूरत होगी. लेकिन ये कंपनियां अपने मौजूदा संकल्पों के मुताबिक उस अवधि तक अपने उत्सर्जन में सिर्फ 33 प्रतिशत की कटौती कर पाएंगी.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कॉर्पोरेट सेक्टर से कार्बन क्रेडिट के जरिए जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने में "लचीलेपन" की मांग बढ़ रही है. कार्बन क्रेडिट के जरिए कंपनियां अपने उत्सर्जन की भरपाई के लिए ऐसे किसी प्रोजेक्ट में पैसा लगा सकती हैं जो उत्सर्जन को कम करता हो, जैसे जंगलों का संरक्षण.
लेकिन आलोचकों का कहना है कि इनकी मदद से कंपनियां को इजाजत मिलती है कि वो अपना प्रदूषण जारी रखें. कार्बन मार्किट वॉच के बेन्या फैक्स ने पत्रकारों को बताया, "हम नरमी दिखा कर और इस तरह की रचनात्मक अकाउंटिंग के जरिए समय बर्बाद नहीं कर सकते हैं."
कुछ कंपनियों की सराहना
इन कंपनियों को इनके जलवायु संकल्पों की ईमानदारी और 1.5 डिग्री सेल्सियस मानदंड की तरफ उनकी प्रगति के हिसाब से रेटिंग दी गई. किसी भी कंपनी को "ऊंची सत्यनिष्ठा" की रेटिंग नहीं मिली, जो सबसे ऊंची रेटिंग है. "ठीकठाक सत्यनिष्ठा" के साथ इटली और स्पेन की बड़ी ऊर्जा कंपनियां एनेल और इबरद्रोला सबसे आगे हैं.
दक्षिण कोरिया की ऊर्जा कंपनी केप्को और जापानी ऑटो कंपनी टोयोटा को सबसे कम स्कोर मिला. टोयोटा ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया कि उसने अभी रिपोर्ट देखी नहीं है और उसके 2050 के संकल्प साइंस-बेस्ड टारगेट इनिशिएटिव से प्रमाणित हैं.
रिपोर्ट में यह जरूर माना गया कि कुछ कंपनियां औरों से बेहतर कर रही हैं. उदाहरण के लिए बताया गया है कि फ्रांसीसी खाद्य कंपनी 'दानोन' ने वादा किया है कि वह ताजे दूध के उत्पादन से मीथेन के उत्सर्जन की मात्रा को "महत्वपूर्ण रूप से" कम करेगी और प्लांट-आधारित उत्पादों की हिस्सेदारी बढ़ाएगी.
वॉल्वो समूह का नाम भी रेखांकित किया गया है, यह कह कर कि कंपनी ने "शून्य उत्सर्जन वाली गाड़ियों, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और लो-कार्बन स्टील और एल्युमीनियम" में निवेश किया है. लेकिन फैशन उद्योग की तरफ खास ध्यान दिलाया गया है. एचएंडएम समूह, नाइकी, एडिडास और जारा की मालिक इंडीटेक्स और यूनिक्लो की मालिक फास्ट रिटेलिंग समेत पांच कंपनियों की समीक्षा की गई.
पाया गया कि इनमें से किसी की भी ऐसे बिजनेस मॉडल की तरफ जाने की इच्छा नहीं है जिसमें पहले से कम उत्पाद बनेंगे और बिकेंगे. एचएंडएम समूह ने कहा कि रिपोर्ट ने उसके ताजा जलवायु आंकड़ों को नहीं देखा है. कंपनी ने दलील दी कि उसने 2019 के मुकाबले 2023 में अपने उत्सर्जन में 22 प्रतिशत कटौती है.
सीके/एए (एएफपी)
(The above story first appeared on LatestLY on Apr 09, 2024 04:50 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

