देश की खबरें | कई साल बीत जाने के बाद भी 11 आदिवासी संग्रहालयों में तीन ही अबतक बनकर हुए तैयार: संसदीय समिति
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नयी दिल्ली, 22 मार्च संसद की एक समिति ने कहा है कि सरकार द्वारा जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान में संग्रहालय स्थापित करने की घोषणा करने के पांच साल से अधिक समय के बाद भी कई (संग्रहालय) अधूरे हैं और उनमें से तीन पर तो काम भी शुरू नहीं हुआ है।
हाल में लोकसभा में पेश की गई एक रिपोर्ट में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता संबंधी संसद की स्थायी समिति ने कहा कि केंद्रीय जनजातीय मामलों का मंत्रालय जनजातीय नेताओं के योगदान को पहचान दिलाने तथा जनजातीय समुदायों में गौरव की भावना पैदा करने के लिए 10 राज्यों में 11 ऐसे संग्रहालयों को सहयोग दे रहा है।
समिति ने कहा है कि लेकिन अबतक केवल तीन संग्रहालयों - झारखंड के रांची में भगवान बिरसा मुंडा मेमोरियल स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय, मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा में बादल भोई राज्य जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय तथा जबलपुर में राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय का उद्घाटन किया गया है।
समिति ने कहा, ‘‘समिति आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, गुजरात और मिजोरम जैसे राज्यों में शेष आठ संग्रहालयों के निर्माण में धीमी प्रगति को रेखांकित करना चाहेगी, क्योंकि उन्हें 2017-18, 2018-19 और 2019-20 में मंजूरी दी गई थी लेकिन अभी तक उनका निर्माण पूरा नहीं हुआ है।’’
उसने यह भी कहा कि केरल, मणिपुर और गोवा में क्रमशः 2017-18, 2018-19 और 2020-21 में नियोजित संग्रहालय ‘कई वर्ष बीत जाने के बाद भी अब भी डीपीआर चरण में हैं।’
समिति ने मंत्रालय से निर्माण में तेजी लाने और यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि नवंबर 2025 की समयसीमा वाले चार संग्रहालय और मई 2026 की समयसीमा वाला एक संग्रहालय समय पर बनकर तैयार हो जाए।
समिति ने कई एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों (ईएमआरएस) के किराये के भवनों में संचालित होने पर भी चिंता जताई।
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