विदेश की खबरें | चीन की मदद के लिए देश की यात्रा कर रहे हैं यूरोपीय संघ के नेता
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

पिछले सप्ताह ही फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुअल मैक्रों ने बीजिंग की राजकीय यात्रा की थी। उनके साथ यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वोन डेर लेयेन भी थीं। इन दोनों की यात्रा से महज कुछ दिन पहले ही स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज चीन गये थे।

जर्मनी की विदेश मंत्री एन्नालेना बेयरबॉक भी बृहस्पतिवार को चीन के पूर्वोत्तर शहर तियानजिन गयी थीं। उनसे पहले जर्मन चासंलर ओलाफ स्कॉल्ज नवंबर में चीन गये थे। यूरोपीय संघ के विदेश नीति प्रमख जोसेफ बोर्रेल भी पिछले सप्ताह चीन में थे लेकिन उन्हें कोविड-19 संक्रमण हो गया।

सत्ताईस देशों वाले यूरोपीय संघ के लिए चीन की यात्रा की वजह स्पष्ट है।

रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के मित्र शी यूक्रेन में युद्ध खत्म करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। चूंकि यह लड़ाई सालभर से अधिक समय से चल रही है, ऐसे में ऊर्जा (ईंधन) के दाम बढ़ गये हैं, कोरोना वायरस महामारी के प्रभाव से उबरने की जेद्दोजेहद कर रही अर्थव्यवस्थाओं को इस लड़ाई से अधिक नुकसान पहुंचा है।

यूरोपीय शी की मदद चाहते हैं। वे चाहते हैं कि शी यूक्रेन के राष्ट्रपति एवं रूस से भी बातचीत करें लेकिन वह उन्हें मुख्य मध्यस्थ के तौर पर नहीं देखते। यूरोपीय संघ के अधिकारियों का कहना है कि यूक्रेन के लिए चीन की प्रस्तावित शांति योजना में वही बातें हैं जो सभी को मालूम हैं और अस्वीकार्य हैं।

यूरोपीय संघ को डर है कि शी रूस को हथियारों की आपूर्ति कर सकते हैं। वह बेलारूस में युक्ति के तौर पर परमाणु हथियार तैनात करने की पुतिन की योजना से परेशान हैं। यह घोषणा शी और पुतिन की भेंट के कुछ ही दिनों आयी।

बेयरबॉक ने कहा कि युद्ध ‘‘मेरे एजेंडे में सबसे ऊपर है।’’ सऊदी अरब और ईरान के बीच तनाव कम करने को लेकर चीन की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘रूस पर उसके प्रभाव का पूरे यूरोप तथा चीन के साथ हमारे संबंधों पर असर होगा।’’

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