नयी दिल्ली, दो जून दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को रेलिगेयर फिनवेस्ट लिमिटेड (आरएफएल) के धन में कथित हेराफेरी के मामले में फोर्टिस हेल्थकेयर के पूर्व प्रमोटर मलविंदर मोहन सिंह और तीन अन्य लोगों को जमानत दे दी। यह मामला दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराधा शाखा (ईओडब्ल्यू) की ओर से मार्च, 2019 में दर्ज किया गया था।
उच्च न्यायालय ने मलविंदर के अलावा रेलिगेयर एंटरप्राइजेज लिमिटेड (आरईएल) के पूर्व सीएमडी सुनील गोधवानी, आरईएल के पूर्व सीईओ कवि अरोड़ा और राजेंद्र अग्रवाल को जमानत दे दी।
राजेंद्र अग्रवाल कुछ कंपनियों के शेयरधारक या निदेशक थे जिनको आरएफएल की ओर से मूल कंपनी आरईएल के इशारे पर कर्ज दिया गया था, लेकिन इसके बाद वे कथित तौर पर कर्ज चुकाने से चूक गये।
शिविंदर मोहन सिंह, गोधवानी और अन्य के खिलाफ आरएफएल के मनप्रीत सूरी की शिकायत पर ईओडब्ल्यू ने मार्च, 2019 में एक प्राथमिकी दर्ज की। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कंपनी का प्रबंधन करने के दौरान उनके द्वारा कर्ज लिया गया था, लेकिन पैसों का अन्य कंपनियों में निवेश किया गया।
मलविंदर, उनके भाई शिविंदर मोहन सिंह (यह भी फोर्टिस हेल्थकेयर के पूर्व प्रमोटर रहे), गोधवानी, अरोड़ा और आरएफएल के पूर्व सीएफओ अनिल सक्सेना को ईओडब्ल्यू ने कथित तौर पर आरएफएल के पैसे में हेराफेरी करने और अन्य कंपनियों में निवेश करने के आरोप में गिरफ्तार किया था।
उच्च न्यायालय ने कहा कि इस मामले में कई सह आरोपियों को जमानत दी जा चुकी है।
न्यायमूर्ति अमित शर्मा ने कहा, ‘‘माजूदा मामले में अदालत की राय है कि यदि अभियोजन के हितों की रक्षा करते हुए आवेदक को जरूरी शर्तों के साथ जमानत पर रिहा किया जाता है, तो निचली अदालत के समक्ष अभियोजन पक्ष के मामले में कोई संभावित पूर्वाग्रह नहीं हो सकता है खासकर तब जब अन्य सहआरोपी पहले ही जमानत हासिल कर चुके हैं।
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