देश की खबरें | ग्रह को सुरक्षित रखने के लिये पर्यावरण नंत्री ने नवाचार, वैज्ञानिक कदमों का आह्वान किया

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नयी दिल्ली, 14 दिसंबर केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने ग्रह को सुरक्षित करने के लिए अभिनव और वैज्ञानिक कदम उठाने का आह्वान करते हुए कहा कि केवल सामूहिक वैश्विक कार्रवाई ही जलवायु परिवर्तन और इसकी चुनौतियों का मुकाबला कर सकती है।

मुंबई में ‘बॉम्बे चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री’ द्वारा आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम ‘सस्टेनेबिलिटी कॉन्क्लेव: टारगेट नेट जीरो’ में अपने मुख्य भाषण में यादव ने कहा कि भारत ने जलवायु परिवर्तन में योगदान नहीं दिया है।

उन्होंने कहा, “हमें भविष्य की पीढ़ियों के लिए अपने ग्रह को सुरक्षित करने के लिए अभिनव, वैज्ञानिक और तत्काल कदमों की आवश्यकता है। सीओपी 26 में भारत की घोषणा 2070 तक नेट जीरो तक पहुंचने के लिए एक महान कदम है क्योंकि हमारा देश जलवायु परिवर्तन का कारण नहीं है और ग्रीनहाउस उत्सर्जन में बहुत अधिक योगदानकर्ता नहीं रहा है।”

यादव ने कहा, “ऐसा कहकर, भारत एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में महसूस करता है कि केवल सामूहिक वैश्विक कार्रवाई ही जलवायु परिवर्तन और इसकी चुनौतियों का मुकाबला कर सकती है।”

उन्होंने कहा कि यह बताते हुए कि भारत पारिस्थितिकी, आर्थिक विकास और स्थिरता के बीच संतुलन साधते हुए ‘नेट ज़ीरो’ की दिशा में क्रमिक रूप से बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र ‘नेट जीरो’ की यात्रा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

मंत्री ने कहा, “मैं बॉम्बे चैंबर से अपील करता हूं कि आपके कार्य, संसाधन, नवाचार करने की क्षमता और अधिक पहुंच क्षेत्र बुनियादी ढांचे, मूल्य श्रृंखलाओं और उनके द्वारा प्रदान किए जाने वाले उत्पादों और सेवाओं के तेजी से विकार्बनन (डीकार्बोनाइज) के लिए महत्वपूर्ण हैं।”

अपने डिजिटल संबोधन में उन्होंने कहा, “निजी क्षेत्र पहले से ही इस जलवायु लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, 64 भारतीय कंपनियों ने पिछले साल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने का संकल्प लिया था।”

निवेश के बारे में उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के मामले में अग्रणी कंपनियों के लिए उच्च पूंजी को स्थानांतरित किए जाने की उम्मीद है, जो पीछे छूट रही कंपनियों के लिए भारी वित्तपोषण के साथ हैं।

यादव ने कहा, “भारतीय सीमेंट उद्योग पहले ही दुनिया भर में सबसे ज्यादा निम्न कार्बन के लक्ष्य में से एक हासिल कर चुका है। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि टिकाऊ जीवन शैली और जलवायु न्याय इस यात्रा के मूल में हों।”

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