पणजी, 15 जून लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विधायिकाओं में उच्च स्तर की चर्चा एवं संवाद की वकालत करते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि संसदीय लोकतंत्र में असहमति व्यक्त करने के पर्याप्त मार्ग हैं और सदन के अंदर मर्यादित आचरण से सदन की प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है।
बिरला ने कहा कि संसद और विधानसभाओं में विधेयकों को पारित कराने के लिए विस्तृत चर्चा जरूरी है ताकि बेहतर कानून बन सकें।
गोवा विधानसभा में 'विकसित भारत 2047: जन प्रतिनिधियों की भूमिका ' विषय पर आयोजित सत्र को संबोधित करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि पंचायत से लेकर संसद तक सभी विधायी संस्थाओं का दायित्व है कि वे जनता की समस्याओं को कार्यपालिका तक प्रभावी रूप से पहुंचायें।
उन्होंने इस बात पर बल दिया कि हमारी विधायिकाओं में चर्चा और संवाद का उच्च स्तर हो तथा विधायिकाओं की कार्यवाही शांति एवं गरिमा के साथ चले।
बिरला ने कहा कि संसदीय लोकतंत्र में असहमति व्यक्त करने के पर्याप्त मार्ग हैं, ऐसे में सदन के अंदर यदि शालीनता से असहमति व्यक्त की जाए तो इससे देश और भारतीय लोकतंत्र की प्रतिष्ठा बढ़ती है।
लोकसभा सचिवालय के बयान के अनुसार, बिरला ने सुझाव दिया कि जनप्रतिनिधि जनता की आशाओं और आकांक्षाओं को सदन में आवाज़ दें जिससे उनकी परेशानियों का हल निकल सके।
उन्होंने कहा, ‘‘ सदन के अंदर मर्यादित आचरण से सदन की प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है। ’’
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि संसद और विधानसभाओं में विधेयकों को पारित कराने के लिए विस्तृत चर्चा जरूरी है ताकि बेहतर कानून बन सकें।
बिरला ने गोवा विधानसभा के विधायकों को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘ यह हमेशा जरूरी होता है कि कानून विस्तृत एवं उपयुक्त चर्चा के बाद बनें।’’
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विधानसभाओं और संसद में चर्चा गैर राजनीतिक और बिना पक्षपात के होनी चाहिए।
बिरला ने अधिक अवधि का सत्र आयोजित करने के लिए गोवा विधानसभा की सराहना की। उन्होंने हालांकि कुछ राज्यों में विधानसभाओं के छोटे सत्र पर चिंता भी जताई।
बिरला ने कहा, ‘‘ सरकार द्वारा लाये गए कानूनी प्रस्तावों पर व्यापक बहस होनी चाहिए। इस चर्चा में हमारा यही उद्देश्य हो कि उनका आम जनमानस के जीवन पर क्या असर पड़ेगा।’’
उन्होंने जोर देकर कहा कि कानूनों पर जितनी व्यापक चर्चा होगी, उतने ही प्रभावी कानून बनेंगे।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि बदलते परिप्रेक्ष्य में विधायिका से आमजन की आशाएं और आकांक्षाएं बढ़ी हैं, साथ ही जनता की आवश्यकताएं भी ज़्यादा बढ़ गई हैं। ऐसे में यह जरूरी है कि हम अपनी प्राथमिकताएं तय करें और उन्हें पूरा करने का पूर्ण प्रयास करें।
उन्होंने कहा कि समकालीन समय में जनता की माँग है कि सदन के माध्यम से उनकी आकांक्षाएँ पूर्ण हों, उनकी समस्याओं का समाधान हो।
बिरला ने कहा, ‘‘ जनप्रतिनिधि के रूप में यह हमारा नैतिक दायित्व है कि हम जनता के सामाजिक आर्थिक विकास के लिए निरन्तर कार्य करें, तथा उनकी आवश्यकताओं को पूर्ण करने के लिए प्रयासरत रहें।’’
उन्होंने कहा कि पिछले 75 वर्षों की लोकतांत्रिक यात्रा में भारत ने अनेक उपलब्धियां हासिल की हैं और शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत ढांचा जैसे क्षेत्रों में देश ने लम्बी छलांग लगायी है जिसका सीधा असर लोगों के जीवन पर पड़ा है।
उन्होंने कहा कि इस यात्रा में विधायी संस्थाओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है और वे लगातार सशक्त हुई हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए बिरला ने कहा कि आज देश में कुशल नेतृत्व और मेहनती लोग हैं जिनके बल पर देश लगातार तरक्की कर रहा है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि 2047 तक विकसित भारत बनाने का सपना अवश्य पूरा होगा।
गोवा के विपक्षी दलों ने बृहस्पतिवार को राज्य विधानसभा में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के संबोधन का बहिष्कार किया और सवाल उठाया कि वह कांग्रेस के नेता राहुल गांधी को मानहानि के एक मामले में संसद की सदस्यता से अयोग्य ठहराए जाने के मुद्दे पर अपना पक्ष रखने का मौका क्यों नहीं दे रहे हैं।
भाजपा के सहयोगी दल समारोह में शामिल हुए। हालांकि, विपक्षी कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (आप), गोवा फॉरवर्ड पार्टी (जीएफपी) और रिवोल्यूशनरी गोवा पार्टी (आरजीपी) के सदस्यों ने इसका बहिष्कार किया।
दीपक
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