देश की खबरें | प्रख्यात वैज्ञानिक आर ए माशेलकर ने कर्नाटक से बौद्धिक संपदा नीति बनाने का अनुरोध किया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. प्रख्यात वैज्ञानिक डॉ. रघुनाथ अनंत (रमेश) माशेलकर ने शुक्रवार को सिफारिश की कि कर्नाटक सब्सिडी और अनुदान के जरिये नवोन्वेषी सूक्षम, लघु और मध्यम उद्यम (एसएमई) को प्रोत्साहन देकर एक बौद्धिक संपदा नीति बनाने में अग्रणी भूमिका निभाए।

बेंगलुरु, एक दिसंबर प्रख्यात वैज्ञानिक डॉ. रघुनाथ अनंत (रमेश) माशेलकर ने शुक्रवार को सिफारिश की कि कर्नाटक सब्सिडी और अनुदान के जरिये नवोन्वेषी सूक्षम, लघु और मध्यम उद्यम (एसएमई) को प्रोत्साहन देकर एक बौद्धिक संपदा नीति बनाने में अग्रणी भूमिका निभाए।

‘बेंगलुरु टेक समिट 2023’ के 26वें संस्करण में एक पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘राज्य एक ज्ञान की राजधानी (नॉलेज कैपिटल) और नवाचार केंद्र है, लेकिन विकास के क्षेत्र में अगली छलांग के लिए हमें तेजी से नवाचार नीत क्रमिक विकास से मिसाल बनने वाले विकास की ओर बढ़ना होगा।’’ उन्होंने विकास की इस रणनीति को ‘एक्सप्रूवमेंट’ करार दिया।

वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के पूर्व महानिदेशक ने स्टार्ट-अप से बेंगलुरु टेक समिट (बीटीएस) के ध्येय वाक्य ‘सीमाओं से परे’ का अनुसरण ना केवल भौगोलिक क्षेत्र में करने के लिए बल्कि अपने मन में भी इसका अनुसरण करने के लिए कहा।

उन्होंने कहा, ‘‘ उत्कृष्टता की सीढ़ियों की कोई सीमा नहीं है और कंपनियों को छलांग लगाने के बजाय ऊंची छलांग के जरिये बढ़त बनाने का हुनर सीखना होगा।’’

‘‘शानदार 40 फीसदी राज्य’’ होने के लिए कर्नाटक की सराहना करते हुए वैज्ञानिक ने कहा, ‘‘कर्नाटक में 40 प्रतिशत ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) हैं, देश की 40 फीसदी साफ्टवेयर प्रतिभा है, 40 प्रतिशत यूनीकॉर्न हैं और इसका देश के निर्यात में 40 फीसदी योगदान है।’’

उन्होंने कहा कि भारत के पास प्रति अमेरिकी डॉलर सबसे ज्यादा बौद्धिक पूंजी है, यही कारण है कि भारतीय नवोन्मेष दुनिया में धूम मचा रहा है।

माशेलकर ने राष्ट्रीय रासायनिक प्रयोगशाला के एक साल के भीतर अंतरराष्ट्रीय परामर्श संगठन बनने और हाल ही में भारत के यूपीआई नवोन्मेष का उदाहरण दिया जिसके तहत वर्ष 2022 में 74.05 अरब से अधिक लेनदेन हुए, जो दुनिया के लेनदेन का 46 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि यूपीआई को अब भूटान और सिंगापुर में भी स्वीकार किया जा रहा है।

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