देश की खबरें | कला के क्षेत्र में प्रख्यात इतिहासकार कविता सिंह का निधन

नयी दिल्ली, 31 जुलाई कला क्षेत्र की प्रख्यात इतिहासकार कविता सिंह का रविवार को निधन हो गया। मित्रों, सहकर्मियों और छात्रों ने उन्हें 'स्टाइलिश सरदारनी', एक अविश्वसनीय रूप से उदार महिला और शक्ति स्तंभ के रूप में याद कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

मशहूर लेखक और शिक्षाविद् सिंह का 58 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे पिछले दो वर्षों से कैंसर से जूझ रही थीं।

सिंह ने वर्ष 2017 से 2019 तक जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड एस्थेटिक्स के डीन का पद संभाला। भारतीय चित्रकला के इतिहास में उनकी विशेषता थी।

प्रसिद्ध इतिहासकार विलियम डेलरिम्पल से लेकर मशहूर अर्थशास्त्री जयती घोष ने "प्रतिभाशाली" और "प्रेरणादायक" सिंह के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए ट्विटर पर अपनी भावनाएं साझा की।

डेलरिम्पल ने कला इतिहासकार की मृत्यु को 'अपूरणीय क्षति' और 'सबसे दुखद समाचार' कहा, वहीं घोष ने सिंह को जेएनयू में 'शक्ति स्तंभ' के रूप में याद किया। घोष के कहा, ''विश्वविद्यालय में सबसे बड़ी चुनौतियों और अपने स्वास्थ्य का प्रबंधन करते हुए उन्होंने अपने शैक्षणिक योगदान का प्रवाह जारी रखा।''

डेलरिम्पल ने ट्वीट में लिखा,'' यह सबसे दुखद खबर है, आपकी आत्मा को शांति मिले। प्रतिभाशाली कविता सिंह, जिन्होंने हमेशा मुगल चित्रकला में अपनी शानदार अंतर्दृष्टि से जयपुर साहित्य महोत्सव को चकाचौंध कर दिया और भारतीय कला के इतिहास के अस्पष्ट पहलुओं पर हम सबको शिक्षित करने के लिए बहुत कुछ किया। कितनी अपूरणीय क्षति है।''

सिंह ने पंजाब विश्वविद्यालय से कला इतिहास में पीएचडी की थी और उन्होंने वर्ष 1991 से 1997 तक नयी दिल्ली में राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान में शिक्षा दी। इसके साथ ही वे राष्ट्रीय संग्रहालय में एक कला संरक्षक भी थीं।

घोष ने ट्वीट किया, ''हमने एक अद्भूत इंसान को खो दिया। कविता सिंह बहादुर, प्रतिभाशाली और प्रतिबद्ध थीं। आशा है उनका व्यक्तित्व दूसरों को प्रेरित करता रहेगा।''

सिंह का सोमवार को दिल्ली के लोधी रोड श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार किया गया।

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