नयी दिल्ली, छह फरवरी उच्चतम न्यायालय ने एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले में गिरफ्तार किये गए वकील सुरेंद्र गाडलिंग और सामाजिक कार्यकर्ता ज्योति जगताप की जमानत याचिका पर सुनवाई बृहस्पतिवार को स्थगित कर दी।
न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति राजेश बिंदल की पीठ ने राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण(एनआईए) की उस याचिका पर भी सुनवाई स्थगित कर दी, जिसमें सामाजिक कार्यकर्ता महेश राउत को दी गई जमानत को चुनौती दी गई थी।
उन्हें बंबई उच्च न्यायालय ने जमानत दे दी थी, लेकिन एनआईए द्वारा फैसले पर रोक लगाने का अनुरोध किये जाने के बाद इसे उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी गई थी।
गाडलिंग की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर ने इस बात से इनकार किया कि उनका मुवक्किल मुकदमे में देरी कर रहा है तथा उन्होंने रिकॉर्ड पेश करने के लिए समय मांगा।
जगताप और राउत की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मिहिर देसाई ने अदालत से मामले की सुनवाई जल्द से जल्द करने का अनुरोध किया।
वहीं, एनआईए की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने कहा कि राउत को जमानत देने संबंधी बंबई उच्च न्यायालय का आदेश ‘‘पूरी तरह से त्रुटिपूर्ण’’ था।
शीर्ष अदालत ने कहा कि वह सभी मामलों की एक साथ सुनवाई करेगी और इसलिए सुनवाई स्थगित की जाती है।
गाडलिंग पर माओवादियों को सहायता प्रदान करने तथा मामले में फरार आरोपियों सहित विभिन्न सह-आरोपियों के साथ षड्यंत्र रचने का आरोप है।
गाडलिंग के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम और भारतीय दंड संहिता(आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।
अभियोजन पक्ष का दावा है कि गाडलिंग ने भूमिगत माओवादियों को सरकारी गतिविधियों और कुछ क्षेत्रों के मानचित्रों के बारे में गुप्त जानकारी उपलब्ध कराई थी।
पुणे में 31 दिसंबर 2017 को आयोजित एल्गार परिषद सम्मेलन में गाडलिंग ने कथित तौर पर भड़काऊ भाषण दिया था।
पुलिस ने दावा किया था कि सम्मेलन में दिये इन भाषणों के कारण अगले दिन पुणे जिले में कोरेगांव-भीमा युद्ध स्मारक के पास हिंसा भड़की थी।
उच्च न्यायालय ने कहा था कि जगताप ने 31 दिसंबर 2017 को पुणे में आयोजित एल्गार परिषद सम्मेलन में नाट्य मंचन के दौरान न केवल ‘‘आक्रामक बल्कि, काफी भड़काऊ नारे’’ दिए थे।
जगताप, कबीर कला मंच (केकेएम) समूह का सक्रिय सदस्य था।
अदालत ने कहा था, ‘‘हमारा यह मानना है कि एनआईए द्वारा अपीलकर्ता (जगताप) के खिलाफ लगाए गए आरोपों को प्रथम दृष्टया सत्य मानने के लिए तर्कसंगत आधार मौजूद हैं, जिसमें उस पर आतंकवादी हमले की साजिश रचने, इसका प्रयास करने और उसे उकसावा देने का आरोप है।’’
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY