मुंबई, 28 जुलाई राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने मंगलवार को बम्बई उच्च न्यायालय को बताया कि उसने सामाजिक कार्यकर्ता और वकील सुधा भारद्वाज द्वारा उस याचिका का ‘‘कड़ा विरोध’’ किया है, जिसमें स्वास्थ्य आधार पर अंतरिम जमानत दिये जाने का अनुरोध किया गया है।
भारद्वाज एल्गार परिषद-कोरेगांव भीमा मामले में एक आरोपी है और सितम्बर 2018 से भायखला महिला जेल में बंद है।
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एनआईए की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल अनिल सिंह ने न्यायमूर्ति आरडी धानुका की अध्यक्षता वाली एक पीठ को बताया कि एजेंसी के पास पर्याप्त सबूत है कि भारद्वाज ने ‘‘राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में भाग लिया था’’, और इस तरह वह जमानत पर रिहा होने की हकदार नहीं हैं।’’
शहर की एक विशेष अदालत से गत 29 मई को जमानत याचिका खारिज होने के बाद भारद्वाज ने स्वास्थ्य आधार पर जमानत के अनुरोध को लेकर उच्च न्यायालय का रूख किया था।
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भायखला जेल में इस वर्ष की शुरूआत में कोरोना वायरस से एक कैदी के संक्रमित पाये जाने के बाद भारद्वाज ने जमानत के अनुरोध को लेकर याचिका दायर की थी।
भारद्वाज की वकील रागिनी आहूजा ने मंगलवार को अदालत को बताया कि भारद्वाज लगभग दो वर्षों से जेल में हैं और वह मधुमेह से पीड़ित है और उन्हें कोविड-19 से संक्रमित होने का अधिक जोखिम है।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सिंह ने हालांकि कहा, ‘‘जहां तक जेल में कोविड-19 से संक्रमित होने की उनकी आशंकाओं का सवाल है, आज कोई भी व्यक्ति कहीं भी कोविड -19 से संक्रमित हो सकता है। कोई बाहर जाने पर, या कार्यालय में, घर में, या कहीं और जाने पर भी कोविड से संक्रमित हो सकता है।”
उन्होंने कहा कि जेल में वास्तव में, अधिकारी सभी सुरक्षा सावधानी बरत रहे हैं और कोविड-19 की रोकथाम और इलाज पर आईसीएमआर के दिशा-निर्देशों को लागू कर रहे हैं।
भारद्वाज की जमानत याचिका पर चार अगस्त को सुनवाई होगी।
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