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देश की खबरें | एल्गार मामला: आरोपी कार्यकर्ताओं ने स्वाभाविक जमानत देने की अपील की

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले में आरोपी सात कार्यकर्ताओं और शिक्षाविदों ने सोमवार को बंबई उच्च न्यायालय से कहा कि गिरफ्तारी के बाद उन्हें हिरासत में भेजने वाली तथा 2019 में पुलिस के आरोपपत्र पर संज्ञान लेने वाली पुणे सत्र अदालत को ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं था, लिहाजा उन्हें स्वाभाविक जमानत दी जानी चाहिये।

देश की खबरें | एल्गार मामला: आरोपी कार्यकर्ताओं ने स्वाभाविक जमानत देने की अपील की

मुंबई, 23 अगस्त एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले में आरोपी सात कार्यकर्ताओं और शिक्षाविदों ने सोमवार को बंबई उच्च न्यायालय से कहा कि गिरफ्तारी के बाद उन्हें हिरासत में भेजने वाली तथा 2019 में पुलिस के आरोपपत्र पर संज्ञान लेने वाली पुणे सत्र अदालत को ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं था, लिहाजा उन्हें स्वाभाविक जमानत दी जानी चाहिये।

याचिकाकर्ताओं में सुधीर धावले, रोना विल्सन, सुरेन्द्र गैडलिंग, शोमा सेन, महेश राउत, वर्नन गोंसाल्वेस और अरुण फरेरा शामिल हैं।

एल्गार परिषद मामला 31 दिसंबर, 2017 को पुणे में आयोजित एक सम्मेलन में कथित तौर पर दिए गए भड़काऊ भाषणों से संबंधित है। पुलिस का दावा है कि सम्मेलन के अगले दिन पुणे के बाहरी इलाके में स्थित कोरेगांव-भीमा युद्ध स्मारक के पास हिंसा हुई थी।

अभियोजन पक्ष का दावा है कि सम्मेलन का आयोजन कथित तौर पर माओवादियों से संबंध रखने वाले लोगों ने किया था।

याचिकाकर्ताओं के वकील, वरिष्ठ अधिवक्ता सुदीप पासबोला ने उच्च न्यायालय से कहा कि चूंकि मामले के सभी आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की धाराओं के अलावा गैरकानूनी गतिविधियां निवारण अधिनियम (यूएपीए) के तहत अनुसूचित अपराधों के लिए आरोप लगाए गए हैं, ऐसे में कोई विशेष अदालत ही मामले का संज्ञान ले सकती थी।

पासबोला ने न्यायमूर्ति एसएस शिंदे और न्यायमूर्ति एनजे जमादार की पीठ से कहा कि जून 2018 में गिरफ्तारी के बाद जब आरोपी याचिकाकर्ताओं को पहली बार पुणे की अदालत में रिमांड के लिए पेश किया गया था, तो उन्होंने अदालत के अधिकार क्षेत्र पर आपत्ति जताई थी। फिर भी, सत्र अदालत मामले की सुनवाई करती रही।

उन्होंने कहा, ''जिस समय मामले में पहला आरोप पत्र दाखिल किया गया था, उस समय पुणे में विशेष अदालतें कार्यरत थीं। इसके अलावा, भले ही उस समय कोई विशेष अदालत न हो तब भी क्योंकि यह मामला यूएपीए में निर्धारित अपराधों से संबंधित था, इसलिये इसे मजिस्ट्रेट की अदालत में जाना चाहिए था। मजिस्ट्रेट अदालत सत्र अदालत को कानून के अनुसार संज्ञान लेने के लिए नामित करती।''

पीठ मंगलवार को कार्यकर्ताओं की याचिका पर राष्ट्रीय अन्वेषण अधिकरण (एनआईए) का पक्ष सुनेगी।

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(The above story first appeared on LatestLY on Aug 23, 2021 07:48 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).