देश की खबरें | विद्युत (संशोधन) विधेयक को लेकर बिजलीकर्मियों ने जताया विरोध

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उत्तर प्रदेश के बिजलीकर्मियों ने विद्युत (संशोधन) विधेयक 2020 के प्रति विरोध जताते हुए सोमवार को काली पट्टी बांधकर काम किया और केंद्र सरकार से यह विधेयक वापस लेने की मांग की।

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लखनऊ, एक जून उत्तर प्रदेश के बिजलीकर्मियों ने विद्युत (संशोधन) विधेयक 2020 के प्रति विरोध जताते हुए सोमवार को काली पट्टी बांधकर काम किया और केंद्र सरकार से यह विधेयक वापस लेने की मांग की।

ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के अध्यक्ष शैलेंद्र दुबे ने बताया कि विद्युत कर्मचारी एवं अभियंता राष्ट्रीय समन्वय समिति (एनसीसीओईई) के निर्णय के अनुसार आज देश के 15 लाख बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों के साथ उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मचारियों, कनिष्ठ अभियंताओं और अभियन्ताओं ने बांह पर काली पट्टी बांधकर विद्युत (संशोधन) विधेयक 2020 के प्रति विरोध जताया।

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उन्होंने कहा कि कोविड -19 की महामारी के बीच जब सारा देश एकजुट होकर संक्रमण से संघर्ष कर रहा है, तब केंद्र सरकार विद्युत (संशोधन) विधेयक 2020 जारी करके निजीकरण करने में लगी है, जिससे बिजली कर्मियों में खासा गुस्सा है।

दुबे ने बताया कि बिजली कर्मचारियों एवं अभियंताओं के संगठनों ने विधेयक में शामिल उपभोक्ता और किसान विरोधी प्रावधानों से सभी प्रांतों के मुख्यमंत्रियों और संसद सदस्यों को पत्र भेजकर अवगत कराया है और उनसे मांग की है कि वे इस विधेयक का प्रबल विरोध करें और इसे वापस कराने के लिए केंद्र सरकार पर दबाव डालें।

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केंद्र सरकार द्वारा निजीकरण के बाद उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली देने के वायदे को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि वस्तुतः निजीकरण किसानों और आम घरेलू उपभोक्ताओं के साथ धोखा है। निजीकरण के बाद एक किसान को लगभग 6000 रुपए प्रति माह और घरेलू उपभोक्ताओं को 6000 से 8000 रुपए प्रति माह तक बिजली बिल देना होगा।

दुबे ने कहा कि निजी वितरण कंपनियों को कोई घाटा न हो इसीलिये सब्सिडी समाप्त करके प्रीपेड मीटर लगाए जाने की योजना लाई जा रही है। सब्सिडी समाप्त होने से किसानों और आम लोगों को भारी नुकसान होगा जबकि क्रॉस सब्सिडी समाप्त होने से केवल उद्योगों और बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को ही लाभ होगा।

उन्होंने मुख्यमंत्रियों के समक्ष यह सवाल उठाया है कि विद्युत (संशोधन) विधेयक 2020 पारित हो गया तो बिजली के मामले में राज्यों के अधिकार का हनन होगा और दर तय करने से लेकर बिजली की शिड्यूलिंग तक में केंद्र का दखल होगा। बिजली के मामले में राज्यों को केंद्र के समान बराबर का अधिकार है मगर विद्युत (संशोधन) विधेयक 2020 के जरिये बिजली के मामले में केंद्र एकाधिकार जमाना चाहता है।

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