इस्लामाबाद, 12 अप्रैल वित्तीय संकट से जूझ रहे पाकिस्तान के उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को शीर्ष अधिकारियों को संबंधित रिकॉर्ड के साथ 14 अप्रैल को पेश होने का आदेश दिया, ताकि यह पता चल सके कि स्पष्ट निर्देशों के बावजूद पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा में मध्यावधि चुनाव कराने के लिए धन जारी क्यों नहीं किया गया।
शीर्ष अदालत ने पिछले हफ्ते संघीय सरकार को पाकिस्तान निर्वाचन आयोग को 10 अप्रैल तक 21 अरब रुपये मुहैया कराने का आदेश दिया था ताकि वह पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा में चुनाव करा सके। न्यायालय ने निर्वाचन आयोग को 11 अप्रैल को धन की उपलब्धता के बारे में एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए भी कहा था।
हालांकि, कोष जारी करने के बजाय, सरकार ने निर्वाचन आयोग के लिए आवश्यक धन के संबंध में संसद में एक विधेयक पेश किया।
अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि क्या सरकार कोष के प्रावधान के संबंध में अदालती आदेशों को लागू करने में सफल रही या क्या यह निर्वाचन आयोग को प्रभावित करने के लिए धन जारी करने में देरी करने का प्रयास है।
पंजाब में 14 मई को चुनाव होने हैं लेकिन खैबर पख्तूनख्वा में चुनाव की तारीख अभी तय नहीं हुई है। निर्देशों का पालन करते हुए, निर्वाचन आयोग ने चुनाव के लिए आवश्यक राशि जारी करने में सरकार की अनिच्छा के बारे में अदालत को सूचित करते हुए, निर्दिष्ट तिथि पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।
अदालत ने वित्त सचिव, स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (एसबीपी) के प्रमुख, अटॉर्नी जनरल और निर्वाचन आयोग को राशि का भुगतान करने में सरकार की विफलता पर नोटिस जारी किया तथा अधिकारियों को 14 अप्रैल को अदालत में पेश होने के लिए कहा।
न्यायालय के रजिस्ट्रार के नोटिस के मुताबिक निर्वाचन आयोग ने कहा है कि कोई कोष जारी नहीं किया गया और न ही उसे प्रदान किया गया। नोटिस के अनुसार, ‘‘न्यायालय के उपरोक्त आदेश का पालन करने में संघीय सरकार की विफलता प्रथम दृष्टया अवज्ञा है।’’
बहरहाल, पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा की प्रांतीय विधानसभाओं के संबंध में कोष को लेकर विधेयक को संसद के किसी भी सदन में मतदान के लिए प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे अनिश्चितता पैदा हो गई है।
सरकार और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान बीच जारी राजनीतिक घमासान के साथ पाकिस्तान गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से भी उसे अभी तक कोई मदद नहीं मिली।
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