देश की खबरें | असम में निर्वाचन आयोग का परिसीमन प्रस्ताव भाजपा को फायदा पहुंचाने की कोशिश: ‘आप’
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. आम आदमी पार्टी (आप) ने शुक्रवार को कहा कि असम में परिसीमन को लेकर निर्वाचन आयोग (ईसी) की ओर से पेश किया गया मसौदा ‘विसंगतियों’ से भरा है। पार्टी ने आरोप लगाया कि आयोग सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को फायदा पहुंचाने की कोशिश में नियमों से भटक गया है।
नयी दिल्ली, सात जुलाई आम आदमी पार्टी (आप) ने शुक्रवार को कहा कि असम में परिसीमन को लेकर निर्वाचन आयोग (ईसी) की ओर से पेश किया गया मसौदा ‘विसंगतियों’ से भरा है। पार्टी ने आरोप लगाया कि आयोग सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को फायदा पहुंचाने की कोशिश में नियमों से भटक गया है।
मसौदे पर सवाल उठाते हुए अरविंद केजरीवाल नीत पार्टी ने मांग की कि आयोग को असम में जनसंख्या में वृद्धि और अन्य कारकों को ध्यान में रखते हुए अपने प्रस्ताव में संशोधन करना चाहिए या 2026 में अन्य राज्यों के साथ नए सिरे से परिसीमन करने के लिए इसे वापस लेना चाहिए।
असम के लिए परिसीमन मसौदा 20 जून को जारी कर आयोग ने प्रस्ताव दिया था कि राज्य में विधानसभा और लोकसभा सीटों की संख्या पहले जैसी रखी जाए यानी विधानसभा की 126 और लोकसभा की 16 सीटें ही रहें।
आयोग ने कई सिफारिशों में यह प्रस्ताव भी दिया था कि अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीटों की संख्या आठ से बढ़ाकर नौ कर दी जाए और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों की संख्या 16 से बढ़ाकर 19 कर दी जाए।
इन प्रस्तावों पर आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्वोत्तर राज्यों के प्रभारी राजेश शर्मा ने कहा कि राज्य की जनसंख्या में वृद्धि को ध्यान में रखते हुए राज्य विधानसभा और लोकसभा सीटों का परिसीमन 2011 की नवीनतम जनगणना के आधार पर किया जाना चाहिए था लेकिन आयोग ने 2001 की जनगणना के आधार पर सिफारिशें की हैं।
उन्होंने कहा, “असम में पहला परिसीमन 1976 में किया गया था जो 1971 की जनगणना पर आधारित था। तब असम की जनसंख्या 1.46 करोड़ थी। उसके बाद 2001 और 2011 में जनगणना कराई गई, लेकिन 2021 में कोई जनगणना नहीं कराई गई।”
‘आप’ नेता ने रेखांकित किया कि किसी भी राज्य में नवीनतम जनगणना आंकड़ों और भौगोलिक परिस्थितियों के आधार पर परिसीमन की कवायद की जाती है।
शर्मा ने कहा, “हमने देखा कि जम्मू-कश्मीर में 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन किया गया था। हम 2023 में हैं और असम की जनसंख्या आज लगभग 3.60 करोड़ है। लेकिन इस बात का कोई वैध कारण नहीं है कि निर्वाचन आयोग असम के लिए 2001 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर परिसीमन प्रस्ताव क्यों लेकर आया है?”
शर्मा ने कहा कि असम की जनसंख्या में ढाई गुना वृद्धि के बावजूद, आयोग ने विधानसभा सीटों की संख्या 126 और लोकसभा क्षेत्रों की संख्या 14 बनाए रखने का प्रस्ताव दिया है।
‘आप’ नेता ने यहां पार्टी मुख्यालय में कहा, “परिसीमन पर निर्वाचन आयोग का मसौदा अनेक कमियों और विसंगतियों से भरा पड़ा है। अपने मसौदा प्रस्ताव में, आयोग ने राज्य की जनसांख्यिकी, भौगोलिक स्थितियों, विभिन्न जातियों और सामाजिक समूहों में बदलाव पर विचार नहीं किया है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग ने असम में राज्य विधानसभाओं और लोकसभा क्षेत्रों की सिर्फ सीमाओं को मनमाने तरीके से बदल दिया है। ‘आप’ नेता ने आरोप लगाया, ''यह सत्तारूढ़ भाजपा को फायदा पहुंचाने का प्रयास है।''
शर्मा ने कहा, "इतनी जल्दी क्या है? ऐसा भेदभावपूर्ण मसौदा क्यों प्रकाशित किया गया है? विभिन्न जातियों और अन्य सामाजिक समूहों पर विचार क्यों नहीं किया गया?"
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