देश की खबरें | विदेश में मौजूद प्रतिभाओं पर कोविड-19 के नकारात्मक आर्थिक प्रभाव को कम करने की हो रही कोशिश : जयशंकर
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नयी दिल्ली, 15 जून विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को कहा कि भारत भावी आव्रजकों का कल्याण सुनिश्चित करने के लिए विदेशी सरकारों के साथ बातचीत कर रहा है। विदेशों में मौजूद भारतीय प्रतिभाओं पर कोविड-19 के नकारात्मक अर्थिक प्रभाव को कम करने के लिए भी ध्यान दिया जा रहा है।
जयशंकर ने ‘प्रोटेक्टर्स ऑफ इमीग्रेंट्स’ (पीओई) के सालाना सम्मेलन के तीसरे सत्र को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए संबोधित करते हुए कहा कि भागीदारों को कोविड-19 से उबरने के बाद अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने तथा अन्य चुनौतियों से निपटने के बारे में सोचना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘हमारी सरकार ने पिछले छह वर्षों में प्रवासी भारतीयों के हितों के बढ़ावा देने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।’’
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य भावी प्रवासियों को बेहतर अवसर मुहैया कराना रहा है।
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विदेश मंत्री ने कहा कि इसलिए सरकार दूसरे देशों की सरकारों के साथ प्रवास और आवागमन समझौतों के जरिए यात्रा की सुगमता और अवसर मुहैया कराने के लिए लगातार बातचीत कर रही है।
उन्होंने कहा, ‘‘फिलहाल हम यह सुनिश्चित करने पर ध्यान केन्द्रित कर रहे हैं कि विदेश में मौजूद हमारी प्रतिभा और कौशल पर महामारी के नकारात्मक आर्थिक परिणामों को कम किया जा सके। ’’
उन्होने कहा कि अनेक भारतीय कई वर्षों तक विदेशों में सेवाएं देने के बाद उन्नत कौशल और क्षमताओं के साथ लौटे हैं, वे देश के विकास में सहयोग देंगे।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक आव्रजन कानून 1983 के तहत निर्धारित प्रक्रिया के मुताबिक पीओई भावी आव्रजकों के आव्रजन को मंजूरी देने के लिए जिम्मेदार है ।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत ने पीओई के तीन नए कार्यालय स्थापित किए हैं, वर्तमान में इसकी संख्या 13 है।
उन्होंने कहा, ‘‘इसके जरिए हम देश के और हिस्से में पहुंच रहे हैं जहां से विदेश के लिए लोग जाते हैं । हमने पीओई और पासपोर्ट कार्यालय के बीच भी तालमेल को बढ़ाया है।’’
जयशंकर ने कहा कि यूएई, सऊदी अरब और खाड़ी के अन्य देशों तथा मलेशिया के साथ ई-माइग्रेट मंच के एकीकरण से इन प्रयासों को और गति मिलेगी ।
कार्यक्रम में उन्होंने प्रवासी भारतीय बीमा योजना जैसी पहल का भी उल्लेख किया जिसके जरिए विदेश जाने वाले कामगारों को बीमा का लाभ मिलता है ।
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