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जरुरी जानकारी | खाद्य तेल-तिलहन कीमतों में रहा मिला-जुला रुख

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. राजधानी दिल्ली में बृहस्पतिवार को तेल-तिलहन थोक बाजार में कारोबार का मिला-जुला का रुख दिखा। सरसों तेल-तिलहन में मामूली सुधार के साथ, मूंगफली तेल-तिलहन कीमतों में मजबूती रही। वहीं सोयाबीन तेल-तिलहन और बिनौला तेल कीमतों में गिरावट देखने को मिली। कच्चे पामतेल (सीपीओ) और पामोलीन तेल कीमतें पूर्ववत बनी रहीं।

जरुरी जानकारी | खाद्य तेल-तिलहन कीमतों में रहा मिला-जुला रुख

नयी दिल्ली, 24 अगस्त राजधानी दिल्ली में बृहस्पतिवार को तेल-तिलहन थोक बाजार में कारोबार का मिला-जुला का रुख दिखा। सरसों तेल-तिलहन में मामूली सुधार के साथ, मूंगफली तेल-तिलहन कीमतों में मजबूती रही। वहीं सोयाबीन तेल-तिलहन और बिनौला तेल कीमतों में गिरावट देखने को मिली। कच्चे पामतेल (सीपीओ) और पामोलीन तेल कीमतें पूर्ववत बनी रहीं।

बाजार सूत्रों ने कहा कि मलेशिया एक्सचेंज में 1.75 प्रतिशत की तेजी थी जबकि शिकॉगो एक्सचेंज कल रात मजबूत बंद हुआ था और फिलहाल यहां गिरावट का रुख है। लेकिन मलेशिया एक्सचेंज में मजबूती रहने के बावजूद कच्चा पामतेल (सीपीओ) और पामोलीन तेल कीमतों के अपरिवर्तित बने रहने का कारण यह है कि अब सूरजमुखी कच्चे तेल को रिफाइंड करने के बाद का थोक भाव तथा सीपीओ से पामोलीन बनाने के बाद के थोक भाव में लगभग एक रुपये का अंतर रह गया है जिसके कारण रिफाइंनिंग फैक्टरी वाली कंपनियां सूरजमुखी तेल की ओर जा रही हैं। हालांकि, खुदरा में इन दोनों तेलों के भाव में काफी अधिक का अंतर है।

सूत्रों ने बताया कि सस्ते दाम पर बाजार में सरसों कम बेचा जा रहा है इस कारण इसमें मामूली सुधार है जबकि मूंगफली की उपलब्धता काफी कम होने से इसकी कीमतों में पर्याप्त सुधार आया। दूसरी ओर आयातकों द्वारा बंदरगाहों पर आयात लागत से कम दाम पर थोक में बेचे जाने की वजह से सोयाबीन तेल-तिलहन कीमतों में गिरावट आई। बिनौले में कारोबार नगण्य है और इसकी अच्छे गुणवत्ता वाले फसल की उपलब्धता कम रहने के बावजूद सस्ते आयातित तेलों की प्रचुरता की वजह से बिनौला तेल कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली।

सूत्रों कहा कि मौजूदा स्थिति में सारे आयातित तेल बाजार में खप रहे हैं जिसकी वजह से देशी तेल- तिलहन का मंडियों में खपना दूभर हो गया है।

उन्होंने कहा कि सूरजमुखी कच्चे तेल का आयात करने में आयातक को 80 रुपये की लागत आती है जो तेल बंदरगाहों पर थोक में 76 रुपये लीटर बिक रहा है। इस तेल को रिफाइंड करने के बाद भाव 81 रुपये लीटर बैठता है। लेकिन खुदरा बाजार में उपभोक्ताओं को यही तेल 140-145 रुपये लीटर बेचा जा रहा है। यानी, आयातक को नुकसान तो हो ही रहा है, बैंकों को, तेल मिलों को, देश के तिलहन किसानों को, उपभोक्ताओं को भी मौजूदा स्थिति से नुकसान हो रहा है। ऐसे में देशी सूरजमुखी, जिसकी लागत आयातित सूरजमुखी से लगभग दोगुनी यानी करीब 150 रुपये लीटर है, कहां खपेगा? ऐसा उस देश में हो रहा है जो खाद्य तेलों की जरूरतों के लिए लगभग 55-60 प्रतिशत आयात पर निर्भर है। इस दिशा में संबंधित विभागों को गौर करना होगा।

बृहस्पतिवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन - 5,560-5,610 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली - 7,715-7,765 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 18,400 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली रिफाइंड तेल 2,690-2,975 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 10,425 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 1,735 -1,830 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 1,735 -1,845 रुपये प्रति टिन।

तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 10,000 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 9,800 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 8,250 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 8,025 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 9,000 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 9,200 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 8,350 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना - 5,055-5,150 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज- 4,820-4,915 रुपये प्रति क्विंटल।

मक्का खल (सरिस्का)- 4,015 रुपये प्रति क्विंटल।

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(The above story first appeared on LatestLY on Aug 24, 2023 09:58 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).