देश की खबरें | टीएएसएमएसी पर ईडी के छापे: तमिलनाडु की याचिका को सूचीबद्ध करने पर उच्चतम न्यायालय करेगा विचार

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को तमिलनाडु सरकार की उस याचिका को सूचीबद्ध करने पर विचार करने पर सहमति व्यक्त की, जिसमें उसने सरकारी शराब विक्रेता के यहां हाल में हुई प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी के खिलाफ उसकी याचिका को मद्रास उच्च न्यायालय से राज्य के बाहर किसी अन्य उच्च न्यायालय में स्थानांतरित करने का अनुरोध किया है।

नयी दिल्ली, चार अप्रैल उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को तमिलनाडु सरकार की उस याचिका को सूचीबद्ध करने पर विचार करने पर सहमति व्यक्त की, जिसमें उसने सरकारी शराब विक्रेता के यहां हाल में हुई प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी के खिलाफ उसकी याचिका को मद्रास उच्च न्यायालय से राज्य के बाहर किसी अन्य उच्च न्यायालय में स्थानांतरित करने का अनुरोध किया है।

मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति एम एस रमेश और न्यायमूर्ति एन सेंथिलकुमार की खंडपीठ ने राज्य संचालित शराब खुदरा विक्रेता पर प्रवर्तन निदेशालय द्वारा हाल में की गई छापेमारी के खिलाफ तमिलनाडु राज्य विपणन निगम (टीएएसएमएसी) द्वारा दायर याचिकाओं पर 25 मार्च को सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया था।

प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने शुक्रवार को राज्य सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विक्रम चौधरी की दलीलों पर गौर किया कि उच्च न्यायालय में अगली सुनवाई से पहले याचिका पर तत्काल सुनवाई की जाए।

तमिलनाडु सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 139 ए के तहत याचिका दायर की है। यह प्रावधान शीर्ष अदालत को किसी मामले को एक उच्च न्यायालय से दूसरे उच्च न्यायालय में स्थानांतरित करने का अधिकार देता है।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘हम इसे सूचीबद्ध करेंगे।’’

इससे पहले, जब 25 मार्च को टीएएसएमएसी और राज्य सरकार की याचिकाएं उच्च न्यायालय के समक्ष सुनवाई के लिए आईं तो पीठ ने कहा कि वह मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर रही है लेकिन उसने कोई कारण नहीं बताया।

ईडी के अनुसार, उसने ‘डिस्टिलरी कंपनियों और बॉटलिंग’ संस्थाओं द्वारा बेहिसाब नकदी और अवैध भुगतान के माध्यम से गंभीर वित्तीय धोखाधड़ी किए जाने का पता लगाया था।

टीएएसएमएसी ने अपनी याचिका में ईडी को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि वह जांच की आड़ में उसके कर्मचारियों को परेशान न करे।

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