देश की खबरें | ईडी के अधिकारी नहीं हैं पुलिस अधिकारी, वे गिरफ्तार नहीं कर सकते: मंत्री सेंथिल ने अदालत से कहा

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. तमिलनाडु के मंत्री वी. सेंथिल बालाजी और उनकी पत्नी मेगाला ने धन शोधन मामले में उन्हें (सेंथिल) गिरफ्तार करने के ईडी के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि शीर्ष अदालत के फैसले के अनुसार ईडी के अधिकारी, पुलिस अधिकारी नहीं हैं और इसलिए वे गिरफ्तार नहीं कर सकते।

नयी दिल्ली, 26 जुलाई तमिलनाडु के मंत्री वी. सेंथिल बालाजी और उनकी पत्नी मेगाला ने धन शोधन मामले में उन्हें (सेंथिल) गिरफ्तार करने के ईडी के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि शीर्ष अदालत के फैसले के अनुसार ईडी के अधिकारी, पुलिस अधिकारी नहीं हैं और इसलिए वे गिरफ्तार नहीं कर सकते।

मंत्री और उनकी पत्नी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने न्यायमूर्ति ए.एस. बोपन्ना और न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश की पीठ के समक्ष धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) के विभिन्न प्रावधानों और शीर्ष अदालत के फैसले का उल्लेख किया और इस बात पर जोर दिया कि एक पुलिस एजेंसी नहीं होने के नाते ईडी के पास गिरफ्तार करने की शक्ति नहीं है।

वरिष्ठ वकील ने कहा, ‘‘पीएमएलए के तहत प्रवर्तन निदेशालय के लिए किसी आरोपी को अपनी हिरासत में लेने का कोई प्रावधान नहीं है, जैसा कि एक पुलिस थाने का प्रभारी अधिकारी सीआरपीसी की धारा 167 के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए कर सकता है।’’

उन्होंने विजय मदनलाल चौधरी मामले में शीर्ष अदालत के 2022 के फैसले का हवाला दिया और कहा कि इसने माना था कि ईडी अधिकारी ‘‘पुलिस अधिकारी’’ नहीं हैं।

विजय मदनलाल चौधरी मामले में अपने फैसले में शीर्ष अदालत ने पीएमएलए के तहत गिरफ्तारी, धनशोधन से अर्जित संपत्ति की कुर्की और तलाशी से संबंधित ईडी की शक्तियों को बरकरार रखा था।

इसने कहा था कि वर्ष 2002 के अधिनियम के तहत अधिकारी, ‘‘पुलिस अधिकारी नहीं हैं’’ और प्रवर्तन मामले की सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) को दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) के तहत दर्ज प्राथमिकी नहीं माना जा सकता।

सिब्बल की दलील पर पीठ ने कहा, ‘‘आपका तर्क यह है कि जब तक आप पुलिस अधिकारी नहीं हैं, तब तक रिमांड (मांगने) का कोई सवाल ही नहीं है।’’

ईडी की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि याचिका पर जल्द फैसला किया जाए क्योंकि जांच एजेंसी के पास हिरासत में मंत्री से पूछताछ करने के लिए केवल 13 अगस्त तक का समय है।

उन्होंने कहा कि जांच पूरी करने और आरोप पत्र दाखिल करने के लिए सीआरपीसी की धारा 167 के तहत निर्धारित 60 दिन का समय 13 अगस्त को समाप्त हो रहा है।

पीठ ने उनकी दलीलों पर गौर किया और कहा कि वह बृहस्पतिवार को सुनवाई जारी रखेगी।

शीर्ष अदालत ने धन शोधन मामले में जांच एजेंसी द्वारा सेंथिल की गिरफ्तारी को बरकरार रखने के मद्रास उच्च न्यायालय के 14 जुलाई के आदेश को चुनौती देने वाली बालाजी और उनकी पत्नी मेगाला द्वारा दायर याचिकाओं पर 21 जुलाई को ईडी से जवाब मांगा था।

मंत्री और उनकी पत्नी ने उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत में दो अलग-अलग याचिकाएं दायर की हैं।

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