देश की खबरें | आर्थिक दबदबे और तकनीकी क्षेत्र में प्रगति से स्पेन में भारत के प्रति जिज्ञासा बढ़ी : ईएफई प्रमुख

नयी दिल्ली, 17 फरवरी स्पेन की सबसे बड़ी समाचार एजेंसी ईएफई की प्रमुख गैब्रिएला कैनस ने कहा कि विश्व में भारत के बढ़ते आर्थिक दबदबे और प्रौद्योगिकी एवं शिक्षा में इसकी प्रगति को यूरोप में सराहना की नजर से देखा जाता है। उन्होंने कहा कि इस वजह से स्पैनिश मीडिया में भारत के प्रति जिज्ञासा बढ़ने के साथ कवरेज में भी वृद्धि हुई है।

कैनस ने मंगलवार को कहा कि भारत को पहले रुढ़िवादी नजरिए से देखा जाता था, लेकिन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत ने जो प्रगति की है, उसको लेकर हाल में स्पेन में उसके बारे में रुचि बढ़ी है।

उन्होंने प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (पीटीआई) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) विजय जोशी के साथ बातचीत के दौरान कहा, ‘‘स्पेन में भारत के प्रति समझ बढ़ी है।’’ यह बातचीत स्पेन और भारत की दो प्रमुख समाचार एजेंसियों के बीच संभावित नयी आपसी साझेदारी पर चर्चा के लिए हुई।

कैनस ने कहा, ‘‘ऐसे कई विषय हैं जिनमें भारत ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है। प्रौद्योगिकी और शिक्षा के क्षेत्र में परिणाम स्पष्ट दिख रहे हैं। बड़ी कंपनियां, बड़े व्यवसायी, सीईओ, प्रौद्योगिकी सीईओ, जो दुनिया भर में सफल रहे हैं।"

उन्होंने कहा कि स्पेन में ऐसी धारणा है कि गतिशील अर्थव्यवस्था, प्रौद्योगिकी और बहुलवादी संस्कृति के साथ भारत जल्द ही दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश के रूप में चीन को पीछे छोड़ देगा।

कैनस और जोशी, दोनों वरिष्ठ दिग्गज पत्रकारों ने इस बात पर जोर दिया कि ‘‘फ्लेमेंको’’ और सांड़ों की लड़ाई वाली भूमि के रूप में स्पेन तथा गरीबी एवं प्राकृतिक आपदाओं से घिरे देश के रूप में भारत की पारंपरिक छवि को तोड़ने की जरूरत है।

कैनस ने 1939 से 1975 तक जनरल फ्रांसिस्को फ्रैंको के शासनकाल का जिक्र करते हुए कहा, "स्पेन में 40 साल की तानाशाही देश को सामाजिक रूप से पीछे ले जाने वाली थी...। हमें फ्लेमेंको नृत्य की भूमि के रूप में देखा जाता है, मानो हमारे पास बताने के लिए कुछ और नहीं है। देश में हुई प्रगति को नजरअंदाज कर दिया गया।"

उन्होंने कहा, "हम, अब बहुत बदल गए हैं। हमें बताना होगा। यह हमारी प्रगति के लिए बहुत अच्छा है।"

जोशी ने कहा कि स्पेन और भारत के बीच खबरों के आदान-प्रदान से एक-दूसरे के बारे में बनी रूढ़िवादी छवि को तोड़ने में मदद मिल सकती है। उन्होंने कहा, "मैं स्वीकार करता हूं कि ज्यादातर भारतीयों के लिए स्पेन फ्लेमेंको, बुल फाइटिंग और टोमैटिना की भूमि है, और यह छवि एक बॉलीवुड फिल्म में दिखाए जाने के बाद और मशहूर हो गयी।"

कैनस ने कहा कि स्पेन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में निवेश के मामले में फ्रांस और जर्मनी से पिछड़ रहा था, लेकिन अब स्थिति बदल रही है।

बातचीत के दौरान, जोशी ने पीटीआई के नए उपक्रमों की जानकारी साझा की, जिनमें हाल ही में शुरू की गई वीडियो सेवा और ‘‘फैक्ट चेक सर्विस’’ भी शामिल है।

उन्होंने कहा, "पीटीआई में जो भी बदलाव हो रहा हो, हमारा आधार सटीकता और निष्पक्ष रिपोर्टिंग है और उस पर हमारा जोर बना रहेगा। यह पीटीआई के मूलभूत मूल्य हैं और हमेशा रहेंगे।"

इस संदर्भ में, दोनों वरिष्ठ पत्रकारों ने ग्राहकों को दी जाने वाली प्रत्येक खबर को सत्यापित करने और समाज में उच्च ध्रुवीकरण के इस दौर में फर्जी खबरों का पर्दाफाश करने की आवश्यकता को भी रेखांकित किया।

उन्होंने कहा कि खबरों का सत्यापन ईएफई और पीटीआई जैसी समाचार एजेंसियों के लिए जहां "दायित्व" और "कर्तव्य" है वहीं अतिरिक्त आय हासिल करने का एक अवसर भी है।

जोशी ने रेखांकित किया, "सत्यापन आर्थिक मुद्दे से कहीं अलग विषय है। यह उसका एक आवश्यक हिस्सा है जो हम हैं... हम सटीकता को सर्वोच्च महत्व देते हैं और जब हम अपने आस-पास इतनी गलत सूचना देखते हैं तो उन गलत खबरों का खंडन करना हमारा कर्तव्य बन जाता है।"

जोशी के अनुसार, भारत में अफवाहें, झूठी खबरों सहित कई विषयों से संबंधित हैं, जिनसे सांप्रदायिकता और धार्मिक भावनाओं के भड़कने की आशंका होती है। वहीं कैनस ने जोर दिया कि स्पेन में मुख्य चुनौतियों में एक चुनौती ऐसी फर्जी खबरें हैं जिनसे ‘‘नस्लवाद को बढ़ावा देने की कोशिश की जाती है।’’

कैनस ने कहा कि यह फर्जी खबरें अप्रवासियों को लक्षित करने के लिए होती हैं, और "मुझे लगता है कि अंत में यह लोगों के दिमाग को प्रभावित कर रही हैं, विशेष रूप से हमारे जैसे देश में जहां बहुत अधिक बेरोजगारी है, जहां लोग इसे इस तरह से देखते हैं कि अप्रवासी उनकी नौकरी छीन सकते हैं।"

ईएफई स्पेन की सबसे बड़ी तथा दुनिया की चौथी सबसे बड़ी समाचार एजेंसी है जिसमें करीब 3,000 कर्मचारी हैं। वहीं पीटीआई भारत की सबसे बड़ी निजी, स्वतंत्र समाचार एजेंसी है, जिसकी स्थापना 1947 में समाचार पत्रों के एक समूह द्वारा की गई थी।

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