ताजा खबरें | पहले कूटनीति दिल्ली के गलियारों तक सीमित थी, अब जनता की सीधी भागीदारी सुनिश्चित: राष्ट्रपति

Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश में जी-20 शिखर सम्मेलन के सफल आयोजन का उल्लेख करते हुए बुधवार को कहा कि पहले कूटनीति को दिल्ली के गलियारों तक सीमित रखा जाता था, लेकिन मौजूदा सरकार ने इसमें जनता की सीधी भागीदारी सुनिश्चित की है।

नयी दिल्ली, 31 जनवरी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश में जी-20 शिखर सम्मेलन के सफल आयोजन का उल्लेख करते हुए बुधवार को कहा कि पहले कूटनीति को दिल्ली के गलियारों तक सीमित रखा जाता था, लेकिन मौजूदा सरकार ने इसमें जनता की सीधी भागीदारी सुनिश्चित की है।

उन्होंने बजट सत्र के पहले दिन लोकसभा एवं राज्यसभा की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए यह भी कहा कि जब दुनिया में उथल-पुथल मची हुई है तो ऐसे मुश्किल दौर में भी सरकार ने भारत को ‘विश्व-मित्र’ के रूप में स्थापित किया है।

राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘संक्रमण काल में एक मजबूत सरकार होने का क्या मतलब होता है, ये हमने देखा है। बीते 3 वर्षों से पूरी दुनिया में उथल-पुथल मची हुई है। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में दरारें पड़ गई हैं। इस कठिन दौर में सरकार ने भारत को विश्व-मित्र के रूप में स्थापित किया है। विश्व-मित्र की भूमिका के कारण ही आज हम ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज़ बन पाए हैं।’’

उनके मुताबिक, बीते 10 वर्षों में एक और पुरानी सोच को बदला गया है।

मुर्मू ने कहा, ‘‘पहले कूटनीति से जुड़े कार्यक्रमों को दिल्ली के गलियारों तक ही सीमित रखा जाता था। मेरी सरकार ने इसमें भी जनता की सीधी भागीदारी सुनिश्चित की है। इसका एक बेहतरीन उदाहरण भारत द्वारा जी-20 अध्यक्षता के दौरान देखा गया। भारत ने जी-20 को जिस प्रकार जनता से जोड़ा वैसा पहले कभी नहीं हुआ।’’

उनका कहना था कि देशभर में हुए कार्यक्रमों के जरिये भारत के वास्तविक सामर्थ्य से दुनिया का परिचय हुआ तथा जम्मू कश्मीर और पूर्वोत्तर में पहली बार इतने बड़े अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम हुए।

राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘पूरी दुनिया ने भारत में हुए ऐतिहासिक जी-20 सम्मेलन की प्रशंसा की। ऐसे बंटे हुए माहौल में भी एकमत से ‘दिल्ली घोषणापत्र’ जारी होना ऐतिहासिक है। ‘वीमेन लेड डेवलपमेंट’ से लेकर पर्यावरण के मुद्दों तक भारत का विजन, दिल्ली घोषणापत्र की नींव बना है।’’

मुर्मू ने कहा, ‘‘हमारे प्रयासों से जी-20 में अफ्रीकी संघ की स्थायी सदस्यता को भी सराहा गया है। इसी सम्मेलन के दौरान भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप गलियारे के निर्माण की घोषणा हुई। यह गलियारा, भारत के सामुद्रिक सामर्थ्य को और सशक्त करेगा। ‘ग्लोबल बायो फ्यूल अलायंस’ का शुरू होना भी बहुत बड़ी घटना है। इस प्रकार के कदम वैश्विक समस्याओं के समाधान में भारत की भूमिका का विस्तार कर रहे हैं।’’

उनके अनुसार, सरकार ने वैश्विक विवादों और संघर्षों के इस दौर में भी भारत के हितों को मजबूती से दुनिया के सामने रखा है।

राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘ भारत की विदेश नीति का दायरा आज अतीत की बंदिशों से कहीं आगे बढ़ चुका है। आज भारत अनेक वैश्विक संगठनों का सम्मानित सदस्य है। आज आतंकवाद के खिलाफ भारत दुनिया की एक प्रमुख आवाज है।’’

उनका कहना था, ‘‘भारत आज संकट में फंसी मानवता की मदद के लिए मजबूती से पहल करता है। दुनिया में कहीं भी संकट आने पर भारत वहां तेज़ी से पहुंचने का प्रयास करता है। मेरी सरकार ने दुनिया भर में काम कर रहे भारतीयों में नया भरोसा जगाया है। ऑपरेशन गंगा, ऑपरेशन कावेरी और वंदे भारत जैसे अभियान चलाकर जहां-जहां संकट आया वहां से हर भारतीय को हम तेजी से सुरक्षित वापस लेकर आए हैं।’’

मुर्मू ने कहा, ‘‘सरकार ने योग, प्राणायाम और आयुर्वेद की भारतीय परंपराओं को पूरी दुनिया तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास किए हैं। पिछले वर्ष, संयुक्त राष्ट्र संघ के मुख्यालय में 135 देशों के प्रतिनिधियों ने एक साथ योग किया। यह अपने आप में एक नया रिकॉर्ड है। मेरी सरकार ने आयुष पद्धतियों के विकास के लिए एक नया मंत्रालय बनाया है।’’

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