देश की खबरें | प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान कश्मीरी पंडितों ने पलायन की जांच हेतु समिति बनाने के लिए दिया धरना
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. संदीप मावा के नेतृत्व में कश्मीरी पंडित वॉलंटियर्स (केपीवी) के सदस्य अपनी मांगों को लेकर पिछले चार दिनों से श्रीनगर में मृत्यु तक अनशन पर बैठे हैं।
संदीप मावा के नेतृत्व में कश्मीरी पंडित वॉलंटियर्स (केपीवी) के सदस्य अपनी मांगों को लेकर पिछले चार दिनों से श्रीनगर में मृत्यु तक अनशन पर बैठे हैं।
कड़ी सुरक्षा के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को जम्मू कश्मीर में 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इनमें बनिहाल-काजीगुंड सड़क सुरंग (टनल) को खोलना भी शामिल है, जो केंद्रशासित प्रदेश के दोनों क्षेत्रों के बीच बारहमासी संपर्क की सुविधा प्रदान करेगी।
केपीवी का एक अन्य समूह विक्रम कौल के नेतृत्व पर यहां प्रेस क्लब के नजदीक धरना पर बैठा, लेकिन पुलिस को मोदी के दौरे की वजह से उन्हें वह स्थान खाली कराना पड़ा।
केपीवी के कम से कम 200 सदस्य मुठी घाट पर जांच की मांग को लेकर धरने पर बैठे। उन्होंने 1990 में आतंकवाद के उभार के बाद हत्याओं और मंदिरों के ध्वस्तीकरण की भी जांच कराने की मांग की।
मावा ने धमकी दी कि अगर अगले कुछ दिनों में उनकी मांगे पूरी नहीं हुई तो वह आत्मदाह कर लेंगे।
वह फारूक अहमद डार उर्फ बिट्टा कराटे के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं जिसने कथित तौर पर वर्ष 1990 में दर्जनों कश्मीरी पंड़ितों की हत्या की बात स्वीकार की है।
कश्मीरी पंड़ितों ने कहा कि वे चाहते हैं कि प्रशासन ‘‘दागी, राष्ट्र विरोधी और भ्रष्ट’’नौकरशाहों को हटाए।
कश्मीर प्रोविंस के संभागीय आयुक्त पांडुरंग के पोले मावा के पास गए और अनशन समाप्त करने का आग्रह किया।
जम्मू में धरना का नेतृत्व कर रहे कौल ने कहा, ‘‘हम विस्थापित कश्मीरी पंडित उनका (मावा) का समर्थन करने आए हैं और इन मांगों को स्वीकार करने की मांग करने आए हैं। डॉ.संदीप मावा को आत्मदाह से बचाना होगा। हम उनके साथ हैं।’’
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