देश की खबरें | एम्स में विशेषज्ञता व कम खर्च के कारण भीड़, भ्रष्टाचार रोकने के लिए कदम उठाए गए : श्रीनिवास

नयी दिल्ली, चार सितंबर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), दिल्ली के निदेशक डॉ. एम श्रीनिवास ने कहा है कि बेहतरीन बुनियादी ढांचा और डॉक्टरों की विशेषज्ञता के कारण सटीक इलाज और कम खर्च जैसी सुविधाएं मरीजों में विश्वास की भावना पैदा करती हैं और इस वजह से देश भर से लोग यहां संस्थान में आते हैं।

श्रीनिवास ने पीटीआई संपादकों के साथ विशेष साक्षात्कार में कहा कि भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश में, ज्यादातर सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ और सुपरस्पेशियलिटी उपचार उपलब्ध नहीं है।

यह पूछे जाने पर कई क्षेत्रीय एम्स खुलने के बावजूद दिल्ली एम्स में मरीजों की संख्या कम नहीं हो रही है, श्रीनिवास ने कहा कि यहां हमेशा आपूर्ति और मांग में अंतर रहता है और अन्य केंद्रों को दिल्ली एम्स के स्तर तक पहुंचने में समय लगेगा।

उन्होंने कहा कि पहले छह एम्स संस्थान बहुत अच्छा काम कर रहे हैं और लगभग दिल्ली एम्स के स्तर पर पहुंच गए हैं।

डॉ. श्रीनिवास ने कहा, "देश में अन्य एम्स स्थापित करने के पीछे यह विचार था कि वे दिल्ली एम्स के स्तर पर आ जाएंगे और सुपरस्पेशियलिटी इलाज मुहैया कराएंगे। ऐसा ज्यादातर केंद्रों के साथ (अब तक) नहीं हुआ है।"

उन्होंने जोर दिया, "आपको यह समझना होगा कि आज हम जो कुछ भी हैं, वह हमारे सात दशक के अच्छे काम की वजह से है। राष्ट्रीय महत्व के संस्थान और उत्कृष्टता केंद्र का दर्जा पाने में समय लगता है।"

उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि लोग सामान्य और छोटी-मोटी बीमारियों के साथ दिल्ली एम्स आते हैं, जिनका इलाज राज्य सरकार के मेडिकल कॉलेज या किसी जिला अस्पताल में हो सकता है।

उन्होंने कहा कि यह भी यहां भीड़ होने की वजह है, जिससे समस्या और बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि इस प्रमुख अस्पताल में रोजाना 12,000 से 15,000 मरीज आते हैं।

देश के इस प्रतिष्ठित संस्थान के निदेशक ने कहा, "एक सीमा के बाद संख्या अधिक होने से अंतत: गुणवत्ता कम हो सकती है। इसके अलावा, हम चुन-चुनकर काम नहीं कर सकते। हम एक हद तक, उन रोगियों को प्राथमिकता देते हैं जिनके मामले जटिल होते हैं और जिन्हें रेफर किया जाता है।"

उन्होने कहा, ‘‘हम हमेशा लोगों से कहते हैं कि अगर आपको कोई जटिल बीमारी है, उपचार सफल नहीं रहा या जब किसी विशेष राज्य या शहर या मेडिकल कॉलेज का डॉक्टर कहता है कि यह मेरी विशेषज्ञता और क्षेत्र से परे है...तो कृपया हमारे पास आएं...यह केवल एम्स जैसे संस्थानों में ही संभव है।’’

भारत के प्रमुख अस्पताल एवं मेडिकल कॉलेज में जवाबदेही और भ्रष्टाचार कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति के तहत किए गए उपायों का विस्तार से जिक्र करते हुए डॉ. श्रीनिवास ने कहा कि देश के अधिकतर सरकारी संस्थान इन समस्याओं का सामना करते हैं।

उन्होंने कहा, "जब आपूर्ति और मांग में असंतुलन होता है... तो कुछ लोग ऐसे होंगे जो उन चीजों का फायदा उठाने का प्रयास करेंगे। पिछले दो वर्ष से हम प्रशासन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए व्यवस्था और प्रक्रियाएं स्थापित करने की खातिर कड़ी मेहनत कर रहे हैं।"

सितंबर 2022 में दिल्ली एम्स के निदेशक का कार्यभार संभालने वाले बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. श्रीनिवास ने कहा कि उनका पहला आदेश पूरे अस्पताल प्रशासन को पूरी तरह से डिजिटल बनाना था।

उन्होंने कहा, "मेरे पहले आदेशों में से एक, पूरे प्रशासन को ई-ऑफिस में बदलना था। खरीद और भर्ती के बारे में, हम कह सकते हैं कि हमने इस तरह से व्यवस्था की है कि सब कुछ पारदर्शी हो। फिलहाल हम प्रशासन के लिहाज से पूरी तरह डिजिटल हैं। अस्पताल के मामले में हम यह काम अलग-अलग तरीके से कर रहे हैं - हर विभाग यह काम कर रहा है।’’

श्रीनिवास ने कहा, "हम राष्ट्रीय एनआईसी पोर्टल पर हैं और ई-अस्पताल भी मौजूद है। बुनियादी सॉफ्टवेयर उपलब्ध हैं, लेकिन हम उससे आगे जाना चाहते हैं ताकि यह पूरी तरह डिजिटल हो जाए।"

भ्रष्टाचार पर काबू संबंधी एक सवाल पर उन्होंने कहा कि प्रमुख संस्थान में विभिन्न स्तरों पर विवेकाधीन शक्तियों में कटौती की गई है। उन्होंने कहा, "शक्ति जहर है और विवेकाधीन शक्तियां घातक हैं... यह बहुत महत्वपूर्ण है कि हम यथासंभव पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए व्यवस्था और प्रक्रियाएं लागू करें।"

डॉ. श्रीनिवास ने कहा कि पारदर्शिता की शुरुआत हुई है और दिल्ली एम्स की खरीद प्रक्रिया ने घोटाला मुक्त संचालन सुनिश्चित किया है।

सरकार की प्रमुख स्वास्थ्य बीमा स्कीम आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना पर टिप्पणी करते हुए श्रीनिवास ने इसे अपने द्वारा देखे गए सर्वश्रेष्ठ और सफल कार्यक्रमों में से एक बताया।

उन्होंने कहा कि इस योजना ने लाखों लोगों को इलाज के दौरान खर्च के कारण गरीबी में फंसने से बचाया है। उन्होंने कहा कि अब तक दिल्ली एम्स में इसके तहत लगभग 30,000 रोगियों का इलाज किया जा चुका है।

एम्स पुनर्विकास मास्टर प्लान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अधिकांश इमारतें पुरानी हो चुकी हैं और नए ब्लॉक बनाने का काम चल रहा है।

उन्होंने कहा, "अभी हम नयी ओपीडी का विस्तार कर रहे हैं... अधिकांश स्पेशलियलिटी नयी बिल्डिंग में भेज दी गयी हैं... कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी, नेत्र विज्ञान जैसी सुपरस्पेशियलिटी के लिए हम नयी ओपीडी इमारत बना रहे हैं।

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