जरुरी जानकारी | अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर दोहरी राहत, औद्योगिक उत्पाद पांच प्रतिशत बढ़ा, महंगाई चार प्रतिशत के नीचे
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. देश की अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर बुधवार को दोहरी राहत मिली। एक तरफ खाने के सामान के दाम में नरमी से खुदरा महंगाई फरवरी में भारतीय रिजर्व बैंक के संतोषजनक स्तर चार प्रतिशत से नीचे 3.61 प्रतिशत पर आ गयी। वहीं दूसरी तरफ, विनिर्माण क्षेत्र के बेहतर प्रदर्शन से औद्योगिक उत्पादन सूचकांक जनवरी में बढ़कर पांच प्रतिशत पर पहुंच गयी।
नयी दिल्ली, 12 मार्च देश की अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर बुधवार को दोहरी राहत मिली। एक तरफ खाने के सामान के दाम में नरमी से खुदरा महंगाई फरवरी में भारतीय रिजर्व बैंक के संतोषजनक स्तर चार प्रतिशत से नीचे 3.61 प्रतिशत पर आ गयी। वहीं दूसरी तरफ, विनिर्माण क्षेत्र के बेहतर प्रदर्शन से औद्योगिक उत्पादन सूचकांक जनवरी में बढ़कर पांच प्रतिशत पर पहुंच गयी।
मुद्रास्फीति में तेज गिरावट से इस बात की संभावना बढ़ी है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) नौ अप्रैल को द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में नीतिगत दर में एक और कटौती कर सकता है। अगर आरबीआई अगले महीने प्रमुख ब्याज दर में कटौती करता है, तो यह दो महीने के भीतर दूसरी ब्याज दर कटौती होगी।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मुख्य रूप से सब्जियों, अंडों और अन्य प्रोटीन युक्त वस्तुओं की कीमतों में कमी के कारण उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित खुदरा मुद्रास्फीति फरवरी में सात महीने के निचले स्तर 3.61 प्रतिशत पर आ गई।
खुदरा मुद्रास्फीति जनवरी माह में 4.26 प्रतिशत और फरवरी, 2024 में 5.09 प्रतिशत रही थी।
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर नवंबर, 2024 से ही रिजर्व बैंक के संतोषजनक दायरे में बनी हुई है। आरबीआई को दो प्रतिशत घट-बढ़ के साथ खुदरा महंगाई को चार प्रतिशत पर रखने की जिम्मेदारी मिली हुई है। केंद्रीय बैंक ने महंगाई के मोर्चे पर राहत मिलने से पिछले महीने रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की कटौती की थी।
खुदरा मुद्रास्फीति और खाद्य मुद्रास्फीति में उल्लेखनीय गिरावट मुख्य रूप से सब्जियों, अंडे, मांस और मछली, दाल और उत्पादों, और दूध और दूध उत्पादों की मुद्रास्फीति में गिरावट के कारण हुई है।
फरवरी में सालाना आधार पर जिन वस्तुओं के दाम में प्रमुख रूप से कमी आई, उनमें अदरक (-35.81 प्रतिशत), जीरा (-28.77 प्रतिशत), टमाटर (-28.51 प्रतिशत), फूलगोभी (-21.19 प्रतिशत), लहसुन (-20.32 प्रतिशत) थीं।
दूसरी तरफ, जिन वस्तुओं के दाम सबसे ज्यादा बढ़े, उनमें नारियल तेल (54.48 प्रतिशत), नारियल (41.61 प्रतिशत), सोना (35.56 प्रतिशत), चांदी (30.89 प्रतिशत) और प्याज (30.42 प्रतिशत) शामिल हैं।
इसके साथ, देश में औद्योगिक उत्पादन में तेजी आई है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार विनिर्माण क्षेत्र के अच्छे प्रदर्शन से औद्योगिक उत्पादन में इस साल जनवरी में पांच प्रतिशत की वृद्धि हुई।
औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के संदर्भ में मापा जाने वाला औद्योगिक उत्पादन जनवरी, 2024 में 4.2 प्रतिशत बढ़ा था।
सरकार ने दिसंबर, 2024 में 3.2 प्रतिशत वृद्धि के अस्थायी अनुमान को संशोधित कर 3.5 प्रतिशत कर दिया गया है।
चालू वित्त वर्ष के पहले 10 माह (अप्रैल-जनवरी) के दौरान आईआईपी की वृद्धि दर कम होकर 4.2 प्रतिशत रही, जो कि एक वर्ष पूर्व इसी अवधि में छह प्रतिशत थी।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जनवरी, 2025 में विनिर्माण क्षेत्र का उत्पादन 5.5 प्रतिशत बढ़ा, जो एक साल पहले इसी महीने में 3.6 प्रतिशत रहा था।
खनन उत्पादन में वृद्धि घटकर 4.4 प्रतिशत रही जो एक साल पहले इसी महीने में छह प्रतिशत थी। बिजली उत्पादन में वृद्धि जनवरी, 2025 में सुस्त होकर 2.4 प्रतिशत रही, जो एक साल पहले इसी महीने में 5.6 प्रतिशत थी।
रेटिंग एजेंसी इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि खाद्य वस्तुओं के दाम में नरमी से खुदरा मुद्रास्फीति में उम्मीद से अधिक गिरावट आई है और यह सात महीने के निचले स्तर पर पहुंच गई है। यह एमपीसी (मौद्रिक नीति समिति) की मध्यम-अवधि लक्ष्य सीमा के मध्य बिंदु (चार प्रतिशत) से काफी कम है।
नायर ने कहा कि फरवरी में मुद्रास्फीति के आंकड़े चार प्रतिशत के नीचे आने से एमपीसी की अगली बैठक में लगातार दूसरी बार 0.25 प्रतिशत की दर कटौती की उम्मीद बढ़ी है। इसके बाद जून या अगस्त की समीक्षा बैठकों में 0.25 प्रतिशत की एक और कटौती हो सकती है।
औद्योगिक उत्पाद सूचकांक पर एमपी फाइनेंशियल एडवाइजरी सर्विसेज एलएलपी के संस्थापक और प्रबंध साझेदार महेंद्र पाटिल ने कहा कि आंकड़े खासकर विनिर्माण और खनन में औद्योगिक गतिविधियों के मजबूत होने का संकेत देते हैं।
उन्होंने कहा ‘‘यह वृद्धि, फरवरी 2025 में खुदरा मुद्रास्फीति के 3.61 प्रतिशत पर कम होने के साथ मिलकर अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक गति का संकेत देती है।’’
इस बीच, बीएसई सेंसेक्स बुधवार को 72.56 अंक यानी 0.10 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,029.76 अंक पर बंद हुआ। इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 27.40 अंक यानी 0.12 प्रतिशत फिसलकर 22,470.50 अंक पर बंद हुआ।
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(The above story first appeared on LatestLY on Mar 12, 2025 08:00 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

