देश की खबरें | दृष्टिबाधित महिला शिक्षक के मामले में डीयू सहानुभूतिपूर्वक विचार करे : अदालत

नयी दिल्ली, 17 फरवरी दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू)से कहा है कि वह दृष्टिबाधित महिला शिक्षक के मामले में सहानुभूतिपूर्वक विचार करे जिसे पूर्व में आवंटित आवास को खाली करने के लिए कहा गया है जबकि वह अपनी शारीरिक अक्षमता की वजह से मुश्किल का सामना कर रही है।

उच्च न्यायालय को सूचित किया गया कि विश्वविद्यालय ने याचिकाकर्ता के लिए एक वैकल्पिक आवास चिह्नित किया है, लेकिन उसके लिए अभी वहां जाना मुश्किल होगा क्योंकि स्नानागार में कोई दरवाजा नहीं है और प्रवेश द्वार को बंद करने के लिए कोई उचित कुंडी नहीं लगी है।

याचिकाकर्ता के वकील ने परिसर में किए जाने वाले मरम्मत कार्यों की एक सूची दी।

न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने 13 फरवरी को पारित आदेश में कहा, ‘‘उम्मीद की जाती है कि विश्वविद्यालय आज से चार हफ्ते के भीतर मरम्मत कार्यों को पूरा कर लेगा।’’

याचिका के अनुसार याचिकाकर्ता 100 प्रतिशत दृष्टिबाधित है और दिल्ली विश्वविद्यालय में कला संकाय के दर्शनशास्त्र विभाग में सहायक प्रोफेसर के रूप में कार्यरत है।

उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा जारी तीन अक्टूबर, 2023 के पत्र को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें विश्वविद्यालय का एक टाइप-वी आवास खाली करने के लिए कहा गया था।

विश्वविद्यालय की ओर से यह कहा गया था कि जिस आवास पर महिला शिक्षक का कब्जा है उसकी जरूरत वार्डन के लिए है।

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