देश की खबरें | मादक पदार्थ आतंकवाद मामला: न्यायालय ने आरोपों को ‘गंभीर’ बताया, जमानत याचिका खारिज की

नयी दिल्ली, 21 फरवरी उच्चतम न्यायालय ने अटारी में 2,700 करोड़ रुपये मूल्य की 532 किलोग्राम हेरोइन और 52 किलोग्राम मिश्रित मादक पदार्थ जब्त किये जाने से संबंधित कथित मादक पदार्थ आतंकवाद मामले में एक आरोपी की जमानत याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी।

न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने तारिक अहमद लोन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कोलिन गोंजाल्विस की इस दलील को खारिज कर दिया कि उसे जमानत दी जानी चाहिए क्योंकि उसके पास से प्रतिबंधित पदार्थ बरामद नहीं हुआ है।

पीठ ने जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा, ‘‘आरोप बहुत गंभीर हैं।’’

आरोपियों पर 2019 में अटारी एकीकृत चेक पोस्ट के माध्यम से पाकिस्तान से भारत में मादक पदार्थ की तस्करी करने की कोशिश करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया था और आरोपपत्र दाखिल किया गया था।

जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा निवासी लोन ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के चार अक्टूबर 2024 के आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत का रुख किया, जिसमें उसे मामले में जमानत देने से इनकार कर दिया गया था।

मोहाली में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की एक विशेष अदालत ने 11 फरवरी 2021 को उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी।

गोंजाल्विस ने जमानत के लिए तर्क दिया कि जिस ट्रक में प्रतिबंधित पदार्थ कथित रूप से तस्करी कर लाए गए थे, और गोदाम उनके मुवक्किल का नहीं है।

उन्होंने कहा कि मामले में चार सह-आरोपियों को जमानत दे दी गई है। पीठ ने लोन को परिस्थितियों में बदलाव होने पर नए सिरे से जमानत याचिका दायर करने की छूट दी।

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