देश की खबरें | मादक पदार्थ मामला : शिअद नेता मजीठिया की जमानत के खिलाफ पंजाब सरकार की याचिका पर सुनवाई चार हफ्ते बाद

नयी दिल्ली, सात फरवरी उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि वह मादक पदार्थ मामले में पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया को जमानत देने के पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ पंजाब सरकार की ओर से दायर याचिका पर चार सप्ताह के बाद सुनवाई करेगा।

न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ ने पंजाब सरकार के इस आग्रह पर यह निर्णय लिया कि मामले में उसका (पंजाब सरकार का) पक्ष रखने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान किसी अन्य अदालत में व्यस्त हैं, इसलिए सुनवाई कुछ देर के लिए स्थगित की जा सकती है।

पीठ ने कहा, “मामले को आज कुछ देर के लिए स्थगित करना मुश्किल होगा। इसके बजाय, हम इसे चार हफ्ते बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करेंगे।”

इससे पहले, 30 जनवरी को न्यायमूर्ति जे के माहेश्वरी के साथ पीठ में शामिल न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने पंजाब सरकार की याचिका पर सुनवाई से खुद को यह कहते हुए अलग कर लिया था कि वह उच्च न्यायालय की उस पीठ का हिस्सा थे, जिसने मादक पदार्थ से जुड़े मामले की जांच के लिए विशेष कार्य बल (एसटीएफ) के गठन का निर्देश दिया था।

नतीजतन, यह मामला भारत के प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ के पास भेजते हुए सुनवाई के लिए अलग पीठ के गठन की मांग की गई थी। इसके बाद, यह मामला न्यायमूर्ति बोस के नेतृत्व वाली पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया गया था।

पंजाब सरकार ने उच्च न्यायालय के 10 अगस्त 2022 के आदेश को चुनौती दी है, जिसमें कहा गया था कि यह मानने के लिए ‘उचित आधार’ थे कि मजीठिया दोषी नहीं हैं।

शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के नेता मजीठिया उसी दिन जमानत पर जेल से रिहा हो गए थे।

मजीठिया के खिलाफ मादक पदार्थ विरोधी स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की वर्ष 2018 की रिपोर्ट के आधार पर पंजाब में मादक पदार्थ गिरोह चलाने के आरोप में मामला दर्ज किया गया था।

एसटीएफ की रिपोर्ट जगजीत सिंह चहल, जगदीश सिंह भोला और मनिंदर सिंह औलख सहित कुछ आरोपियों द्वारा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को दिए गए इकबालिया बयानों पर आधारित थी।

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