देश की खबरें | मादक पदार्थों का सेवन राष्ट्रीय समस्या, सभी एजेंसियों में बेहतर समन्वय जरूरी : बिरला

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शुक्रवार को कहा कि मादक पदार्थों का सेवन एक राष्ट्रीय समस्या है और इस खतरे से निपटने के लिए सभी कानून अनुपालन निकायों, खुफिया एजेंसियों, सीमावर्ती जिलों तथा राज्यों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता है।

गंगटोक, 24 फरवरी लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शुक्रवार को कहा कि मादक पदार्थों का सेवन एक राष्ट्रीय समस्या है और इस खतरे से निपटने के लिए सभी कानून अनुपालन निकायों, खुफिया एजेंसियों, सीमावर्ती जिलों तथा राज्यों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता है।

राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (सीपीए) भारत क्षेत्र के 19वें वार्षिक जोन 3 सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए बिरला ने कहा, ‘‘ मादक पदार्थों का सेवन निश्चित रूप से एक राष्ट्रीय समस्या है। यह सीमा से परे अपराध है, जो इस समस्या को अत्यंत चुनौतीपूर्ण बना देता है।’’

पूर्वोत्तर राज्यों से लगी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं तथा पहाड़ी क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि इन क्षेत्र में नशीले पदार्थों के अवैध व्यापार का खतरा अधिक है।

लोकसभा सचिवालय के बयान के अनुसार, बिरला ने कहा कि मादक पदार्थों के इस खतरे से निपटने के लिए न केवल सभी कानून अनुपालन निकायों एवं खुफिया एजेंसियों के बीच बल्कि सभी सीमावर्ती जिलों तथा राज्यों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता है।

उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों को सभी स्तरों पर सहयोग और समन्वय करने तथा हर समुदाय तक अपनी बात पहुंचाने का आग्रह किया और इस मुहिम को जन आंदोलन बनाने पर ज़ोर दिया।

साइबर धमकियों से निपटने के विषय में बिरला ने असम सरकार के सुरक्षा अभियान हेतु यू-रिपोर्ट, इंटरैक्टिव डिजिटल टूल की प्रशंसा की और अन्य राज्यों में इन्हें लागू किए जाने पर ज़ोर दिया।

बिरला ने नीतियों और कानूनों में सुधार और समय के अनुसार बदलाव करने की जरूरत बताई ताकि आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए कानूनी तंत्र को मजबूत बनाया जा सके। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो साइबर धमकियों सहित ऐसे खतरों से निपटने के लिए कठोर कानून पारित किए जाएंगे।

संसद और विधानसभाओं को जनता के लिए अधिक सुलभ बनाने के विषय पर लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि आज के समय में तकनीक में तेजी से बदलाव हो रहा है, इसलिए हम सभी को सक्रिय रहना होगा।

बिरला ने बताया कि संसद में महत्वाकांक्षी ‘डिजिटल संसद परियोजना’ पर कार्य चल रहा है, जिसका प्रमुख उद्देश्य संसद के कामकाज को लोगों के लिए और सुलभ बनाना तथा सांसदों एवं नागरिकों के बीच संपर्क का एक प्रभावी माध्यम बनाना है।

लोकसभा अध्यक्ष ने राजनीतिक विमर्श में असंसदीय व्यवहार एवं अवांछनीय शब्दावली के प्रयोग पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह की घटनाओं से लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का विश्वास कम होता है।

उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में शुचिता आवश्यक है क्योंकि जनमानस पर इसका गहरा प्रभाव पड़ता है। बिरला ने सुझाव दिया कि जनप्रतिनिधि सदन के भीतर और बाहर अपने व्यवहार को संयमित और गरिमामय रखें।

अपने समापन भाषण में सिक्किम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने कहा कि राष्ट्रमंडल संसदीय संघ एक समुदाय के रूप में लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था के उच्चतम मानकों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के साथ मिलकर काम करता है।

आचार्य ने कहा कि नशा और मादक द्रव्यों की वजह से युवा देश की मुख्य धारा से जुड़ने में विफल रहते हैं या यदि वे जुड़ते भी हैं तो उनकी उपस्थिति नगण्य होती है।

उन्होंने कहा, ‘‘ समय आ गया है कि विधायक इस मुद्दे की जड़ तक जाएं और इसे पूरी तरह से उखाड़ फेंकने का प्रयास करें। ’’

दीपक

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

\