देश की खबरें | डॉ. कफील खान ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार विशेषज्ञ समूह को लिखा पत्र, जेल मे यातना का लगाया आरोप
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

गोरखपुर (उप्र), 21 सितंबर बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. कफील खान ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार विशेषज्ञों के समूह को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि मथुरा जेल में रहने के दौरान उन्हें ‘यातना’ दी गई थी।

खान को पिछले साल सीएए विरोधी आंदोलन के दौरान अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में कथित तौर पर भड़काऊ भाषण देने के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत गिरफ्तारी के उपरांत मथुरा जेल में रखा गया था।

यह भी पढ़े | How Will India Distribute COVID-19 Vaccine: भारत में कोविड-19 की वैक्सीन बनने के बाद आखिर कैसे होगी वितरित? क्या खत्म होगा कोरोना वायरस.

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार विशेषज्ञों को भेजे गये पत्र में कफील ने जेल में अपने साथ हुये दुर्व्यवहार का जिक्र करते हुए कहा, ''मुझे मानसिक और शारीरिक दोनों तरह से प्रताड़ित किया जाता था, कई कई दिन खाना और पानी नहीं दिया जाता था। क्षमता से अधिक कैदियों से भरी जेल में रहने के दौरान मेरे साथ अमानवीय व्यवहार किया जाता था।''

खान ने 17 सितंबर को एक पत्र के जरिये संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार विशेषज्ञों को धन्यवाद दिया। यह पत्र उन्होंने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार विशेषज्ञों की 26 जून 2020 की उस चिट्ठी के संदर्भ में लिखा है जिसमें इनलोगों ने भारत सरकार से उन्हें तुरंत रिहा करने की अपील की थी।

यह भी पढ़े | Bhiwandi Building Collapse: भिवंडी बिल्डिंग हादसा, मरने वालों की संख्या बढ़कर 12 हुई.

यह मानवाधिकार समूह स्वतंत्र विशेषज्ञों का है और इसमें संयुक्त राष्ट्र के कर्मी शामिल नहीं हैं।

खान को हाल ही में इलाहाबाद उच्च न्यायालय से जमानत मिली थी ।

खान ने सोमवार को पीटीआई- से बातचीत में कहा, ''राजनीतिक असंतुष्टों के विरूध्द बिना किसी सुनवाई के कठोर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून/यूएपीए के लगाना सभी मामलों में निंदनीय है।''

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)