नयी दिल्ली, छह मार्च उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने अंतरिक्ष क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नियमों (एफडीआई) में बदलाव को अधिसूचित कर दिया है।
इस संबंध में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 21 फरवरी को फैसला किया था।
सरकार ने अंतरिक्ष क्षेत्र में विदेशी और निजी कंपनियों को आकर्षित करने के प्रयासों के तहत उपग्रहों के लिए उपकरण बनाने में 100 प्रतिशत विदेशी निवेश की अनुमति दी है।
डीपीआईआईटी ने प्रेस नोट में कहा, ‘‘निवेश करने वाली इकाई अंतरिक्ष विभाग की तरफ से क्षेत्र के लिए समय-समय पर जारी किए गए दिशानिर्देशों का पालन करेंगी।’’
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, अब उपग्रह उप-क्षेत्र को ऐसे प्रत्येक क्षेत्र में विदेशी निवेश के लिए परिभाषित सीमा के साथ तीन अलग-अलग गतिविधियों में विभाजित किया गया है।
इससे पहले, अंतरिक्ष क्षेत्र में सरकार की अनुमति से उपग्रह स्थापना और परिचालन के लिए 100 प्रतिशत तक की एफडीआई की अनुमति थी।
इस नीति में किए गए बदलाव के तहत सरकार ने उपग्रह विनिर्माण और परिचालन, उपग्रह से मिलने वाले आंकड़ों जैसे क्षेत्रों में स्वत: मार्ग से 74 प्रतिशत तक एफडीआई की मंजूरी दी है। इन क्षेत्रों में इस सीमा से अधिक के निवेश के लिए सरकार से मंजूरी लेनी होगी।
प्रक्षेपण वाहनों और संबंधित प्रणालियों एवं उप प्रणालियों, अंतरिक्ष यान को प्रक्षेपित करने और उसकी वापसी के लिए ‘स्पेसपोर्ट’ के निर्माण को लेकर स्वत: मंजूर मार्ग से 49 प्रतिशत तक एफडीआई की अनुमति दी गयी है। इससे अधिक एफडीआई के लिए सरकार की मंजूरी की आवश्यकता होगी।
इसके अलावा, उपग्रहों और ‘ग्राउंड’ एवं उपयोगकर्ता खंड के लिए उपकरणों और प्रणालियों एवं उप-प्रणालियों के विनिर्माण को लेकर स्वत: मंजूर मार्ग के तहत 100 प्रतिशत तक विदेशी निवेश की अनुमति दी गयी है।
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