औरंगाबाद, चार सितंबर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने राज्य के जालना जिले में मराठा आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे लोगों से सोमवार को मुलाकात की और कहा कि प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज का आदेश देने वालों को मराठवाड़ा में प्रवेश नहीं करने देना चाहिए।
ठाकरे जालना के अंतरवाली सारथी गांव पहुंचे और मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की मांग को लेकर एक हफ्ते से भूख हड़ताल कर रहे मनोज जारांगे से मुलाकात की।
ठाकरे ने कहा, ‘‘नेतागण आपसे वोट मांगते हैं और फिर आपको छोड़ देते हैं। आंदोलनकारियों को उन नेताओं को मराठवाड़ा में नहीं प्रवेश करने देना चाहिए जिन्होंने लाठीचार्ज का आदेश दिया था...। जब तक नेतागण माफी नहीं मांग लेते तब तक उनके साथ यही व्यवहार करना चाहिए।’’
अंतरवाली सारथी गांव जाते समय मनसे नेता ने जामखेड फाटा में आंदोलनकारियों से मुलाकात की।
उन्होंने कहा, ‘‘पहले, नेताओं ने अरब सागर (मुंबई तट के पास) में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा लगाने का वादा किया और आपके वोट लि लिए, लेकिन वोट लेने के बाद आपके मुद्दों को नजरअंदाज कर दिया गया।’’
ठाकरे ने कहा कि राज्य के उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस विपक्ष को इस मुद्दे पर राजनीति नहीं करने की सलाह दे रहे हैं।
उन्होंने दावा किया, ‘‘लेकिन, अगर फडनवीस विपक्ष में होते तो यही करते।‘‘
ठाकरे ने कहा, ‘‘मैंने आंदोलनकारियों के मुद्दे सुने हैं। मैं कानूनी सलाह के बाद इसके समाधान के लिए मुख्यमंत्री से बात करूंगा। आज चुनाव नहीं है, लेकिन चुनाव आये तो लाठियों (आंदोलनकारियों पर) के निशान याद रखना।’’
इस बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की राष्ट्रीय सचिव पंकजा मुंडे ने सोमवार सुबह औरंगाबाद से अपनी शिव शक्ति यात्रा की शुरूआत की। उन्होंने कहा कि मराठा आरक्षण मुद्दे पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है।
मुंडे ने कहा, ‘‘मराठा समुदाय की ऐसी स्थिति बेहद दुखद है... इस घटना की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इस आंदोलन (मराठा समुदाय के) को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। साथ ही यह भी ध्यान रखना चाहिए कि यह कोई राजनीतिक नहीं बल्कि संवैधानिक मुद्दा है।’’
मराठा आरक्षण की मांग को लेकर जालना जिले के अंतरवाली सारथी गांव में भूख हड़ताल पर बैठे एक व्यक्ति को अधिकारियों ने गत शुक्रवार को अस्पताल में भर्ती कराने की कोशिश की जिसका प्रदर्शनकारियों ने विरोध किया। इसके बाद हिंसा भड़क गई थी। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े थे।
हिंसा में 40 पुलिसकर्मियों सहित कई व्यक्ति घायल हुए थे और राज्य परिवहन की 15 से अधिक बसों में आग लगा दी गई थी।
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