देश की खबरें | कश्मीर में पदस्थापित डोगरा कर्मचारियों ने लक्षित हत्याओं के खिलाफ प्रदर्शन किया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के डोगरा कर्मचारियों ने अल्पसंख्यकों की लक्षित हत्याओं को लेकर बुधवार को यहां विरोध प्रदर्शन किया और घाटी से तत्काल स्थानांतरित करने की मांग की।

जम्मू, 19 अक्टूबर केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के डोगरा कर्मचारियों ने अल्पसंख्यकों की लक्षित हत्याओं को लेकर बुधवार को यहां विरोध प्रदर्शन किया और घाटी से तत्काल स्थानांतरित करने की मांग की।

विरोध प्रदर्शन शनिवार को शोपियां जिले में एक कश्मीरी पंडित पूरन कृष्ण भट की हत्या के बाद हुआ है, जिनकी कथित तौर पर आतंकवादियों ने गोली मारकर जान ले ली थी। भट की हत्या के मद्देनजर कई संगठनों ने पूरे केंद्र शासित प्रदेश में विरोध प्रदर्शन किया, वहीं कश्मीरी प्रवासी पंडित संगठनों ने बेरोकटोक लक्षित हत्याओं पर चिंता व्यक्त की।

जम्मू स्थित आरक्षित वर्ग कर्मचारी संघ के बैनर तले कर्मचारी एकत्रित हुए। प्रशासन पर निशाना साधते हुए प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि घाटी में सेवारत अल्पसंख्यक समुदायों के 7,000 कर्मचारी ‘‘दोषपूर्ण और असंवैधानिक स्थानांतरण नीति’’ के कारण ‘‘कैद’’ हो गए हैं जिससे उन्हें कश्मीर से बाहर स्थानांतरित करने की अनुमति नहीं है।

उन्होंने घाटी में सेवाओं में शामिल होने को लेकर मजबूर करने के मनमाने आदेश जारी करने के लिए प्रशासन पर भी पलटवार किया। एक प्रदर्शनकारी कर्मचारी ने कहा कि ड्यूटी पर नहीं आने के बाद प्रशासन ने उनका वेतन रोक दिया है।

प्रदर्शनकारी कर्मचारी सुनीता देवी ने कहा, ‘‘हम किसके आदेश को स्वीकार करें? आतंकवादी धमकी भरे पत्र भेजकर हमें चेतावनी देते हैं कि अगर हम घाटी वापस लौटे तो हमें मार दिया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि काम पर लौटें या वेतन रोके जाने अथवा सेवा से बर्खास्तगी का सामना करें।’’

उन्होंने कहा, ‘‘चार माह से वेतन नहीं दिया जा रहा है। बड़े त्योहारों पर भी वेतन जारी नहीं किया गया है। सरकार घाटी से स्थानांतरण और पुनर्वास की हमारी मांगों को पूरा करने में विफल रही है।’’

दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले में 31 मई को एक स्कूली शिक्षिका रजनी बाला की हत्या के बाद कर्मचारी जम्मू लौट आए। कर्मचारी संघ ने प्रशासन और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर प्रत्येक घटना के बाद केवल ‘‘जुबान चलाने’’ और निंदा करने को लेकर निशाना साधा।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि आतंकवादी अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों को मार रहे हैं और खुले तौर पर जिम्मेदारी लेने का दावा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे न केवल सरकार को चुनौती दे रहे हैं बल्कि कर्मचारियों में भय का माहौल भी पैदा कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि एक साल से अल्पसंख्यकों की लक्षित हत्याएं जारी हैं, लेकिन सरकार न केवल उनकी रक्षा करने में विफल रही है, बल्कि उनमें विश्वास भी पैदा नहीं कर सकी है।

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