देश की खबरें | दाखिल खारिज प्रविष्टि से व्यक्तिगत स्वामित्व या हित के पक्ष में कोई हक नहीं बनता: न्यायालय
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि दाखिल खारिज (म्यूटेशन प्रविष्टि) से किसी व्यक्ति के पक्ष में किसी संपत्ति का ‘‘अधिकार, स्वामित्व या हित’’ नहीं मिलता है और यह केवल वित्तीय उद्देश्य के लिए है।
नयी दिल्ली, 10 सितंबर उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि दाखिल खारिज (म्यूटेशन प्रविष्टि) से किसी व्यक्ति के पक्ष में किसी संपत्ति का ‘‘अधिकार, स्वामित्व या हित’’ नहीं मिलता है और यह केवल वित्तीय उद्देश्य के लिए है।
किसी संपत्ति के दाखिल का अर्थ स्थानीय नगर निगम या तहसील प्रशासन के राजस्व रिकॉर्ड में स्वामित्व का हस्तांतरण या परिवर्तन है।
न्यायमूर्ति एम आर शाह और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की पीठ ने कहा कि इस पर भी विवाद नहीं हो सकता कि वसीयत के आधार पर अधिकार का दावा वसीयत करने वाले की मृत्यु के बाद ही किया जा सकता है।
पीठ ने कहा, ‘‘कानून की प्रतिपादित व्यवस्था के अनुसार म्यूटेशन प्रविष्टि किसी व्यक्ति के पक्ष में कोई अधिकार, स्वामित्व या हित नहीं देती है और राजस्व रिकॉर्ड में म्यूटेशन प्रविष्टि केवल वित्तीय उद्देश्य के लिए है।’’
शीर्ष अदालत ने कहा कि यदि स्वामित्व के संबंध में कोई विवाद है और विशेष रूप से जब वसीयत के आधार पर म्यूटेशन प्रविष्टि की मांग की जाती है, तो जो पक्ष स्वामित्व या अधिकार का दावा कर रहा है, उसे उपयुक्त अदालत का दरवाजा खटखटाना होगा।
न्यायालय ने कहा कि आवेदक के अधिकारों को केवल सक्षम दीवानी अदालत के जरिए ही हासिल किया जा सकता है और अदालत के निर्णय के आधार पर जरूरी म्यूटेशन प्रविष्टि की जा सकती है।
न्यायालय ने अपने पिछले फैसलों का जिक्र करते हुए कहा कि राजस्व रिकॉर्ड में संपत्ति के म्यूटेशन से न तो संपत्ति का स्वामित्व बनता है और न ही समाप्त होता है। इस तरह की प्रविष्टियां केवल भू-राजस्व हासिल करने के लिए प्रासंगिक हैं।
शीर्ष अदालत ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के एक आदेश को बरकरार रखते हुए यह फैसला सुनाया। उच्च न्यायालय ने रीवा मंडल के अतिरिक्त आयुक्त द्वारा पारित आदेश रद्द कर दिया गया था, जिसमें एक व्यक्ति ने वसीयत के आधार पर म्यूटेशन की मांग की थी।
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