देश की खबरें | डिजिटल तकनीक से आमजन को समय पर न्याय मिलने में मदद मिलेगीः रीजीजू

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री किरेन रीजीजू ने शनिवार को कहा कि 'पेपर लेस' कार्य को बढ़ावा देने के साथ-साथ न्याय कार्यों में पारदर्शिता लाने के लिए विधि एवं न्याय मंत्रालय भी अपनी कार्य प्रणाली में डिजिटल मॉडल अपनाने की ओर बढ़ रहा है।

उदयपुर, 17 सितम्बर केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री किरेन रीजीजू ने शनिवार को कहा कि 'पेपर लेस' कार्य को बढ़ावा देने के साथ-साथ न्याय कार्यों में पारदर्शिता लाने के लिए विधि एवं न्याय मंत्रालय भी अपनी कार्य प्रणाली में डिजिटल मॉडल अपनाने की ओर बढ़ रहा है।

रीजीजू यहां 'इमर्जिंग लीगल इश्यूज-2022' विषय पर आयोजित दो दिवसीय कांफ्रेंस के उदघाटन समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश में अदालतों को डिजिटल किया जा रहा है उससे देश के लोगों को अपने मामले के बारे में जानकारी हासिल करने में सुविधा मिलेगी और उन्हे समय पर न्याय मिल सकेगा।

केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री ने कहा कि देश के सभी उच्‍च न्‍यायालयों में एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऑफ इण्डिया लगाए जाएंगे ताकि भारत सरकार के मामलों की प्रभावी पैरवी हो सके। उन्होंने कहा कि न्यायिक प्रणाली को पुनर्विचार करने का समय आ गया है। उच्‍च न्‍यायालयों व निचली अदालतों में आधारभूत सुविधा बढ़ाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि 'कोलेजियम सिस्टम' पर विचार करने की जरूरत है ताकि नियुक्तियों में तेजी ला सकें।

आधिकारिक बयान के अनुसार मंत्री ने कहा कि देश में अनेक एकेडमी बनी हुई है उसी दिशा मे हम 'लॉ एकेडमी' बनाने का काम कर रहें हैं।

केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री ने कहा कि देश में कानून मजबूत होगा तो देश मजबूत होगा और लोगों को समय पर न्याय मिल सकेगा। उन्होनें कहा कि देश में चार करोड़ अस्सी लाख लंबित मामले हैं उन्हे कम करने के लिए न्याय प्रणाली को प्रभावी ढंग से काम करने की आवश्यकता है।

जजों की भर्ती एवं चयन के बारे में मंत्री ने कहा कि सरकार इस दिशा में कार्य कर रही है। केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि आज के समय में हम सोशल मीडिया की टिप्पणी से बच नहीं सकते इस बारे में देश के प्रधान न्यायाधीश ने भी विध‍ि व न्याय मंत्रालय को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि इससे बचने के लिए ठोस कदम उठाने के लिए सरकार और न्यायपालिका को मिलकर कार्य करने की आवश्यकता है।

उन्होंने इस अवसर पर अदालतों में लंबित मामले होने के क्या कारण हैं इस पर विचार करने और उन्हे कैसे कम किया जावे इस दिशा में काम करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

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