देश की खबरें | लोकतंत्र में मतभेदों को चर्चा के जरिये सुलझाया जाए : बिरला

नयी दिल्ली, दो मई लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मंगलवार को कहा कि लोकतंत्र में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन मतभेदों को चर्चा के माध्यम से सुलझाना चाहिए तथा नियोजित ढंग से सदन की कार्यवाही में व्यवधान डालना अनुचित है।

बिरला मेघालय के विधायकों के लिए संसद भवन परिसर में आयोजित प्रबोधन कार्यक्रम का उद्घाटन कर रहे थे। इस मौके पर उन्होंने कहा कि सदन के नियमों, प्रक्रियाओं और परंपराओं के मौजूदा ढांचे के तहत, कोई सदस्य सार्वजनिक महत्व के मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठा सकता है, जनता की समस्याओं को उजागर कर उनके निवारण की मांग कर सकता है और नीति निर्माण पर सार्थक प्रभाव डाल सकता है ।

उन्होंने कहा, ‘‘सरकार की आलोचना करते समय या किसी मुद्दे पर सरकार का ध्यान आकर्षित करते समय, सदस्यों को समन्वित और पूर्व नियोजित तरीके से सदन की कार्यवाही में व्यवधान नहीं डालना चाहिए।’’

लोकसभा सचिवालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, बिरला ने कहा कि पूरी दुनिया में हमारे विधान मंडलों को आदर्श और विधायिका को लोकतांत्रिक परिचर्चा के सर्वोच्च मंच के रूप में देखा जा रहा है, इसलिए जनप्रतिनिधियों को अनुशासन और मर्यादा के दायरे में रह कर आचरण करना चाहिए तथा राजनीतिक लाभ के लिए सभा की कार्यवाही को रोकना उचित नहीं है।

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि किसी भी विषय पर विरोध दर्ज करने के लिए सभा की कार्यवाही को बाधित करने से जनता में यह गलत संदेश जाता है कि जनसामान्य इतनी परेशानियों में घिरा है और उसके प्रतिनिधि सदन का कीमती समय नष्ट कर रहे हैं।

बिरला ने कहा कि सदन में सहमति हो, असहमति हो लेकिन व्यवधान और शोरगुल नहीं हो।

उन्होंने जनप्रतिनिधिओं से कहा कि उन्हें सदन में ऐसा आचरण करना चाहिए, जिससे देश और प्रदेश में यह संदेश जाए कि राष्ट्र के समक्ष मौजूदा समस्याओं पर सदन में पूरी प्रतिबद्धता के साथ विचार हो रहा है।

संसदीय प्रक्रिया का जिक्र करते हुए बिरला ने सुझाव दिया कि विधानसभाओं की नियम समिति नियमित रूप से बैठक करें, नियमों की समीक्षा करें और सुनिश्चित करें कि नियम और अधिनियम समय की मांग के अनुसार संशोधित किये जाएं।

उन्होंने कहा कि विधानसभाओं द्वारा विधानों के प्रभाव का अध्ययन और समीक्षा की जानी चाहिए।

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि लोकतांत्रिक परंपराएं और मूल्य भारत की सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक हैं तथा सहिष्णुता, राजनैतिक मतभेद के बावजूद एक दूसरे के प्रति सम्मान की भावना, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और लोकतांत्रिक मूल्यों के आधार पर मुद्दों का समाधान करना सदियों से भारत की पहचान तथा भारतीय राजनीतिक विचारधारा का अभिन्न अंग रहे हैं।

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