डीएचसीबीए ने अदालतों के चरणबद्ध तरीके से काम करने को लेकर उच्च न्यायालय को सुझाव दिए
एसोसिएशन ने अपने सुझाव उस समिति को दिए जिसका गठन दिल्ली उच्च न्यायालय ने लॉकडाउन खत्म होने के बाद उसके और सुनवाई अदालतों के समक्ष आने वाली चुनौतियों के मद्देनजर सामान्य कामकाज के लिए चरणबद्ध योजना बनाने के लिए गठित किया है।
नयी दिल्ली, 28 अप्रैल दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (डीएचसीबीए) ने कोरोना वायरस की वजह से लॉगू लॉकडाउन हटने के बाद समाजिक दूरी का अनुपालन करते हुए अदालतों में चरणबद्ध तरीके से नियमित और सामान्य कार्य के लिए सुझाव दिए हैं।
एसोसिएशन ने अपने सुझाव उस समिति को दिए जिसका गठन दिल्ली उच्च न्यायालय ने लॉकडाउन खत्म होने के बाद उसके और सुनवाई अदालतों के समक्ष आने वाली चुनौतियों के मद्देनजर सामान्य कामकाज के लिए चरणबद्ध योजना बनाने के लिए गठित किया है।
उच्च न्यायालय ने जिला अदालतों से कहा है कि वे संबंधित बार एसोसिएशन से राय लेकर अपने सुझाव उच्च न्यायालय की वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति हिमा कोहली की अध्यक्षता में गठित समित को भेजे।
डीएससीबीए ने समिति को लिखी चिट्ठी में कहा कि अदालत में कार्यवाही न केवल आवश्यक राहत देने तक सीमित होनी चाहिए बल्कि आम याचिकाकर्ताओं को कानूनी उपचार भी मिलना चाहिए।
एसोसिएशन ने कहा कि जिन मामलों को सूचीबद्ध किया जाता है उनमें निषेधाज्ञा राहत, जमानत अर्जी, फैसले का स्थगन, मध्यस्थ फैसले पर आपत्ति, याचिकाओं का निपटारा, सभी प्रकार की रिट याचिका और फौजदारी अर्जी को भी शामिल किया जाना चाहिए।
डीएससीबीए ने कहा कि ‘‘ न्याय तक पहुंच किसी भी लोकतांत्रिक समाज की कसौटी है और अदालत इसका अभिन्न अंग है और कार्यपालिका द्वारा इसे आवश्यक सेवा घोषित किए जाने की जरूरत नहीं है।’’
एसोसिएशन ने कहा, ‘‘वह मानता है कि अदालतों में सामाजिक दूरी मानदंडों के सावधानीपूर्वक और स्पष्ट अनुपालन, मास्क पहन कर और स्वच्छता के उच्च मानक लागू कर चरणब: तरीके से सामान्य कार्यवाही शुरू की जानी चाहिए।’’
डीएससीबीए ने कहा कि हालात सामान्य होने तक याचिकाकर्ताओं और इंटर्न को अदालत, चेंबर के आने की अनुमति नहीं देनी चाहिए और पक्ष रखने वाले वकीलों के ही आने का नियम जारी रहना चाहिए।
एसोसिएशन ने सुझाव दिया कि अदालत परिसर में प्रवेश के लिए एक रास्ता होना चाहिए और आने वाले की जांच और संक्रमण मुक्त करने की व्यवस्था होनी चाहिए।
डीएससीबीए ने कहा कि जिला कानूनी सेवा अधिकरण और मध्यस्थता केंद्रों में वादियों की व्यक्तिगत उपस्थिति की जरूरत होती है इसलिए हालात सामान्य होने तक वहां पर पूर्ण कार्यवाही शुरू नहीं की जा सकती इसलिए मध्यस्थता प्रक्रिया वादियों के बिना भी की जा सकती है।
उल्लखेनीय है कि उच्च न्यायालय ने 21 अप्रैल को सभी जिला, सत्र और पारिवारिक अदालतों को पत्र लिखकर लॉकडाउन के बाद सामान्य कार्य शुरू करने के लिए चरणबद्ध योजना देने को कहा था।
अदालत ने कहा था कि लॉकडाउन के तुरंत बाद सभी के लिए अदालत खोलना व्यावहारिक नहीं होगा क्योंकि करीब आठ लाख मामले जिला अदालतों में लंबित है और 80 हजार मामले उच्च न्यायालय के विचारधीन है और ऐसे में अदालत में बड़ी संख्या में लोग आएंगे।
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(The above story first appeared on LatestLY on Apr 28, 2020 11:40 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

