देश की खबरें | धारावी परियोजना : आर्थिक मामलों पर असर के कारण पुरानी निविदा रद्द की गई, महाराष्ट्र सरकार ने कहा

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. महाराष्ट्र सरकार ने शुक्रवार को बंबई उच्च न्यायालय को बताया कि कोविड-19 महामारी, यूक्रेन-रूस युद्ध समेत आर्थिक और वित्तीय मामलों को प्रभावित करने वाले कारकों के कारण धारावी पुनर्विकास परियोजना के लिए 2018 की निविदा को रद्द कर दिया गया था और 2022 में एक नयी निविदा जारी की गई थी।

मुंबई, 24 फरवरी महाराष्ट्र सरकार ने शुक्रवार को बंबई उच्च न्यायालय को बताया कि कोविड-19 महामारी, यूक्रेन-रूस युद्ध समेत आर्थिक और वित्तीय मामलों को प्रभावित करने वाले कारकों के कारण धारावी पुनर्विकास परियोजना के लिए 2018 की निविदा को रद्द कर दिया गया था और 2022 में एक नयी निविदा जारी की गई थी।

गौतम अडाणी के कारोबारी समूह ने 259 हेक्टेयर क्षेत्र के पुनर्विकास के लिए 5,069 करोड़ रुपये की बोली लगाकर 2022 की निविदा हासिल की थी।

वर्ष 2018 की निविदा को रद्द करने और अतिरिक्त शर्तों के साथ 2022 में एक नयी निविदा जारी करने के सरकार के फैसले को संयुक्त अरब अमीरात की कंपनी सेशलिंक टेक्नोलॉजी कॉरपोरेशन द्वारा उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई, जो 7200 करोड़ रुपये की बोली के साथ पहली निविदा में सबसे अधिक बोली लगाने वाली कंपनी बनी थी।

राज्य के आवास विभाग ने याचिका के जवाब में दाखिल अपने हलफनामे में कहा कि पहले की निविदा को रद्द करने और वित्तीय एवं आर्थिक मामलों समेत कई कारकों के कारण नयी शर्तों के साथ एक नयी निविदा जारी करने का निर्णय लिया गया था।

हलफनामे में कहा गया, ‘‘वर्तमान आर्थिक स्थिति कोविड-19 महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध, रुपये-डॉलर दर पर अनिश्चितता, ब्याज दर में अस्थिरता और आम निवेशक की समग्र उच्च जोखिम धारणा से प्रभावित हुई है।’’

हलफनामे में कहा गया है कि इसलिए सरकार ने कानूनी सलाह लेकर निविदा रद्द करने और जनहित में नयी निविदा निकालने का फैसला लिया। पुनर्विकास परियोजना के लिए पहली निविदा नवंबर 2018 में जारी की गई थी, और बोलियां मार्च 2019 में खोली गई थीं। उसी महीने रेलवे ने पुनर्विकास परियोजना के लिए सरकार को अतिरिक्त 45 एकड़ जमीन उपलब्ध कराई थी।

आवास विभाग के हलफनामे में दावा किया गया है कि सरकार और याचिकाकर्ता कंपनी के बीच कोई अनुबंध नहीं हुआ, इसलिए, उसका (कंपनी का) कोई कानूनी अधिकार नहीं है।

हलफनामे में कहा गया, ‘‘याचिकाकर्ता के पास निविदा प्रक्रिया में निविदा प्राप्त करने का कोई निहित अधिकार नहीं है। कोई भी व्यक्ति जो बोली प्रस्तुत करता है, केवल वैध रूप से उम्मीद कर सकता है कि उसकी बोली पर गैर-मनमाने और पारदर्शी तरीके से विचार किया जाएगा। किसी भी व्यक्ति को अधिकार के रूप में सरकार के साथ व्यापार करने का हक नहीं है।’’

हलफनामे में कहा गया है कि 28 नवंबर, 2018 की पहली निविदा को 5 नवंबर, 2020 के एक सरकारी प्रस्ताव द्वारा रद्द कर दिया गया था क्योंकि ‘‘बोली के लिए नियत तारीख’’ के बाद निविदा की स्थिति में भौतिक परिवर्तन हुआ था।

याचिकाकर्ता कंपनी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिनव चंद्रचूड़ और अधिवक्ता सुरेश अय्यर तथा जेनिल शाह ने दलील दी कि कंपनी ने 7200 करोड़ रुपये की बोली लगाई थी, जबकि दूसरी निविदा (अडाणी समूह) में उच्चतम बोली 5,069 करोड़ रुपये की थी। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एस वी गंगापुरवाला और न्यायमूर्ति संदीप मार्ने की पीठ ने शुक्रवार को कहा कि वह याचिका पर 14 मार्च को सुनवाई करेगी।

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