देश की खबरें | हनी ट्रैप कांड में जब्त सामान और संपत्ति की जांच रिपोर्ट का ब्योरा पेश किया जाये : अदालत

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. मध्यप्रदेश के कुख्यात हनी ट्रैप कांड में जिला अदालत ने पुलिस को बृहस्पतिवार को आदेश दिया कि वह इस मामले में जब्त सामान और संपत्ति की जांच रिपोर्ट का ब्योरा सात सितंबर तक उसके सामने स्पष्ट तौर पर पेश करे।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

इंदौर, तीन सितंबर मध्यप्रदेश के कुख्यात हनी ट्रैप कांड में जिला अदालत ने पुलिस को बृहस्पतिवार को आदेश दिया कि वह इस मामले में जब्त सामान और संपत्ति की जांच रिपोर्ट का ब्योरा सात सितंबर तक उसके सामने स्पष्ट तौर पर पेश करे।

विशेष न्यायाधीश रेणुका कंचन ने शहर के पलासिया पुलिस थाने के प्रभारी को इस बाबत आदेश दिया।

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अदालत ने आदेश में कहा, "प्रकरण में जब्त मुद्दा माल (अपराध की जांच के दौरान जब्त सामान) की जानकारी दिये जाने के लिये (पुलिस को) 24 अगस्त और 27 अगस्त को पत्र जारी किये गये थे। इसके परिप्रेक्ष्य में आपके (पुलिस) द्वारा आज जानकारी दी गयी है कि मामले में जब्त कुछ संपत्ति जांच के लिये भेजी गयी है। लेकिन जांच रिपोर्ट अप्राप्त है।"

विशेष न्यायाधीश ने कहा, "आपकी (पुलिस) ओर से स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है कि कौन-सी संपत्ति जांच के लिये कहां भेजी गयी है, जांच रिपोर्ट प्राप्त करने के लिये आपके द्वारा क्या प्रयास किये गये हैं और यह रिपोर्ट किस कारण से अविलंब प्राप्त नहीं हो सकी है?"

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अदालत ने इस बात को रेखांकित किया कि हनी ट्रैप कांड के आरोपी लम्बे समय से न्यायिक हिरासत के तहत जेल में बंद हैं और उन्होंने मुकदमे में आरोप तय किये जाने की गुहार की है।

हनी ट्रैप गिरोह की पांच महिलाओं और उनके ड्राइवर को भोपाल और इंदौर से सितंबर 2019 में गिरफ्तार किया गया था।

पुलिस ने इस मामले में एक स्थानीय अदालत में 16 दिसंबर 2019 को पेश आरोप पत्र में कहा था कि यह संगठित गिरोह मानव तस्करी के जरिये भोपाल लायी गयी युवतियों के इस्तेमाल से धनवान लोगों और ऊंचे ओहदों पर बैठे लोगों को अपने जाल में फांसता था। फिर अंतरंग पलों के खुफिया कैमरे से बनाये गये वीडियो, सोशल मीडिया चैट के स्क्रीनशॉट आदि आपत्तिजनक सामग्री के आधार पर उन्हें ब्लैकमेल करता था।

आरोप पत्र के मुताबिक हनी ट्रैप गिरोह ने उसके जाल में फंसे रसूखदारों को धमकाकर उनसे सरकारी कारिंदों की "ट्रांसफर-पोस्टिंग" की सिफारिशें तक करायी थीं और इन कामों के आधार पर भी अवैध लाभ कमाया था।

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