विदेश की खबरें | दशकों की कोशिशों के बावजूद लैंगिक हिंसा को रोकने में नहीं मिल रही सफलता
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

मेलबर्न, 27 नवंबर (360इंफो) ‘ग्लोबल 16 डेज कैम्पेन’ (16 दिवसीय वैश्विक अभियान) शुरू होने के दशकों बाद भी महिलाओं के खिलाफ हिंसा व्यापक पैमाने पर जारी है और वास्तविक लैंगिक समानता लाने की दिशा में बड़ी बाधा है।

लैंगिक समानता की पैरवी करने वाले कार्यकर्ता 1991 से हर वर्ष 16 दिन के लिए लैंगिक हिंसा से निपटने के उद्देश्य से एक वैश्विक अभियान चलाते हैं, लेकिन इसकी शुरुआत के तीन दशक से अधिक समय बाद भी महिलाओं एवं लड़कियों के खिलाफ हिंसा एक व्यापक वैश्विक मुद्दा बनी हुई है और वास्तविक लैंगिक समानता प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण बाधा है।

इस समय इजराइल-हमास युद्ध सहित कई वैश्विक संघर्ष सुर्खियों में हैं। ऐसे में दुनिया भर में संघर्ष से जुड़ी यौन हिंसा व्यापक स्तर पर मौजूद है। इसके अलावा घरेलू हिंसा की घटनाएं भी बढ़ रही हैं, जबकि कम से कम 155 देशों में यह गैरकानूनी है।

‘डिस्ट्रॉय द जॉइंट्स काउंटिंग डेड वुमेन’ परियोजना के शोधकर्ताओं के अनुसार, दक्षिण ऑस्ट्रेलिया में कथित तौर पर पुरुषों द्वारा चार महिलाओं की हत्या कर दी गई और इसी के साथ इस साल ऑस्ट्रेलिया में हिंसक घटनाओं में मारी गईं महिलाओं की संख्या बढ़कर कम से कम 53 हो गई है।

कुछ दिन पहले ही भारत में एक पुरुष ने 16 वर्षीय एक लड़की की धारदार हथियार से हत्या करने का प्रयास किया। इससे कुछ सप्ताह पहले ही दिल्ली के एक व्यक्ति का विवाह प्रस्ताव ठुकराने वाली 30 वर्षीय महिला के कथित उत्पीड़न और हत्या की घटना सामने आई थी।

यह स्पष्ट है कि हालिया वर्षों में ‘मी टू’ आंदोलन सहित कुछ अहम पहलों के बावजूद दुनिया भर में महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा जारी है। इनमें तस्करी और वैवाहिक बलात्कार से लेकर बाल विवाह और बाल यौन शोषण तक के मामले शामिल हैं।

दुनिया भर में हर तीन में से लगभग एक महिला अपने जीवनसाथी के हाथों शारीरिक या यौन हिंसा का शिकार होती है और इस आंकड़े में यौन उत्पीड़न शामिल नहीं है।

अच्छी खबर यह है कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा को रोका जा सकता है और विभिन्न देशों की सरकारें तेजी से यह स्वीकार कर रही हैं कि लैंगिक हिंसा एक सार्वजनिक संकट है जिसका बड़ा आर्थिक खामियाजा भी भुगतना पड़ता है।

कानून, प्रौद्योगिकी और स्वास्थ्य सेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में नवाचार लैंगिक हिंसा और असमानता की समस्या से निपटने में मदद कर रहे हैं और आशा की किरण बने गए हैं।

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