विदेश की खबरें | अवसाद: सेरेटोनिन का कम स्तर संभवत: कारण नहीं-लेकिन अवसाद रोधी दवाएं अब भी काम कर रहीं

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. लंदन, 23 जुलाई (द कन्वरसेशन) नवीनतम अध्ययन में न्यूरोट्रांसमीटर सेरोटोनिन के अवासद से जुड़ने के परस्पर विरोधी संबंध के सबूत मिले हैं।

श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

लंदन, 23 जुलाई (द कन्वरसेशन) नवीनतम अध्ययन में न्यूरोट्रांसमीटर सेरोटोनिन के अवासद से जुड़ने के परस्पर विरोधी संबंध के सबूत मिले हैं।

द कन्वरसेशन के लिए लिखे लेख में अनुसंधान के लेखकों ने निष्कर्ष निकाला है कि यह कहना असंभव है कि एसएसआरआई अवसाद रोधी दवा लेना लाभदायक है। लेकिन क्या निष्कर्ष निकालना सुरक्षित है कि सेरोटोनिन अवसाद में संलिप्त नहीं है या आधुनिक अवसाद रोधी दवाएं इस स्थिति के इलाज के लिए कारगर नहीं हैं?

अवसाद सामान्य और गंभीर जीवन को सीमिति कर देने वाली स्थिति है। निराशा का भाव और आनंद का अभाव इसके मुख्य लक्षण हैं, लेकिन कई अनूठे लक्षणों के संयोजन से बीमारी का पता लगाया जा सकता है। अवसाद ग्रस्त दो लोगों के एकदम से अलग-अलग लक्षण हो सकते हैं।

अवसाद के कारण अलग-अलग होते हैं और लोगों में लक्षणों के लिए बहुत ही अलग कारण हो सकते हैं। मानसिक आघात स्थापित खतरा है। कई अध्ययनों में सूजन को स्थापित संभावित कारण माना गया है।

कई आनुवांशिक कारणों की भी पहचान की गई है और प्रत्येक का बहुत ही कम प्रभाव होता है। संभवत: हजारों आनुवांशिकी प्रभाव प्रत्येक व्यक्ति में होते हैं और लगभग अनोखे संयोजन अवसाद के खतरे को बढ़ा सकते हैं।

खतरे का यह पहलू व्याख्या करता है कि क्यों कुछ लोग अन्य के मुकाबले अकसर अवसाद में चले जाते हैं। लेकिन खतरे के कई पहलू अकसर अवसादग्रस्त व्यक्ति द्वारा बताए जाते हैं, और सामान्यत: यह संभव नहीं है कि यह निष्कर्ष निकाला जाए कि कौन-अगर कोई है तो-उनके लक्षण का मुख्य कारक रहा है।

अवसाद कई लक्षणों वाला होता है, जिसे मुख्यत: उसके लक्षणों से परिभाषित किया जाता है, इसके कई साधारण गुप्त कारणों की वजह से एक स्थिर स्थिति होने की संभावना बहुत कम होती है।

इसी प्रकार, बहुत कम संभावना है कि सभी व्यक्तियों का एक ही पद्धति या दवा से इलाज हो जाए। लेकिन लक्षणों में विविधता और अवसाद को रेखांकित करने वाले खतरों का अभिप्राय यह नहीं है कि हमारे पास प्रभावी इलाज की कमी है।

अवसाद रोधी दवाओं की खोज शुरुआत में क्षय रोग के इलाज में इस्तेमाल दवाओं के नए उद्देश्य के इस्तेमाल के साथ हुई। उस समय इन दवाओं के मस्तिष्क पर असर की कम समझ थी।

शुरुआती अनुसंधान में खुलासा हुआ कि अवसाद रोधी दवाएं मस्तिष्क में सेरोटोनिन और नोरएड्रकनालिन का स्तर बढ़ा देती हैं। इस जानकारी ने अवसाद के सिद्धांत का आधार बनाया जिसे मोनोअमिन परिकल्पना के नाम से जानते हैं। इसमें परिकल्पित किया गया कि इन न्यूरोट्रांसमीटर के निम्न स्तर से अवसाद की स्थिति उत्पन्न होती है और इसे अवसाद रोधी दवाओं से ठीक किया जा सकता है।

अवसाद और उसके इलाज की इस साधारण व्याख्या के जवाब में कई विरोधाभासी आंकड़े और न्यायोचित संशयवाद और कई वैकल्पिक सिद्धांत प्रस्तावित किए गए।

चार दशक से भी अधिक समय तक कुछ अनुसंधानकर्ता और चिकित्सा पेशेवर अवसाद का उल्लेख साधारण तौर पर ‘‘रासायनिक असंतुलन’’ के तौर पर करते रहे।

हालांकि, अब भी सेरोटोनिन की भूमिका को पूरी तरह से खारिज कर देना समझदारी नहीं होगा क्योंकि ऐसे कुछ सबूत हैं जो अवसाद में इसकी संलिप्तता के बारे में बताते हैं। हालांकि, मानव मस्तिष्क के ऊतकों तक सीमित पहुंच की वजह से सेरोटोनिन की भूमिका की प्रत्यक्ष रूप से पुष्टि करना मुश्किल है।

अवसाद और अवसाद रोधी इलाज के प्रति हमारी सीमित समझ ने उपरोक्त उल्लेखित अध्ययन के लेखकों को सवाल उठाने को प्रेरित किया कि क्या अवसाद रोधी दवाएं इलाज में मददगार हैं।

ये आलोचनाएं नयी नहीं हैं, लेकिन उन्होंने (पुराने आलोचकों ने) गलत रुख अपनाया कि प्रभावी इलाज के लिए तंत्र की समझ आवश्यक है।

इसके विपरीत, प्रभावी इलाज की पहचान के लिए मानक यादृच्छिक नियंत्रित परीक्षण है, जिसे बड़े पैमाने पर अवसाद रोधी दवाओं और मनोचिकित्सा पद्धति के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

इस तरह के अध्ययन विश्वसनीय तरीके से बता सकते हैं कि इलाज काम कर रहा है या नहीं। भले ही हमें यह नहीं पता हो कि क्यों इलाज प्रभावी है।

आशंकाओं से परे हजारों अवसादग्रस्त लोगों पर किए गए यादृच्छिक नियंत्रण परीक्षण से पता लगा है कि निश्चित तौर पर अवसाद रोधी दवाएं अवसाद के इलाज में कारगर हैं।

अवसाद रोधी दवाओं से इलाज करा रहे लोगों के साथ किए गए अध्ययन अहम सूचना दे सकते हैं कि कैसे इलाज लाभ पहुंचा रहा है। ये भविष्य में अहम जानकारी दे सकते हैं कि क्यों कुछ लोगों पर ये दवाएं अन्य से अधिक प्रभावी साबित होती हैं।

लक्षणों के आधार पर परिभाषित स्थिति पर अनुंसधान व इलाज करना मुश्किल होता है , लेकिन इसने प्रभावी इलाज विकसित करने से नहीं रोका।

स्थिति की अपर्याप्त जानकारी और कैसे इलाज काम करेगा, इसकी सीमित जानकारी के बावजूद अवसाद का आम तौर पर अवसाद रोधी दवा या बातचीत पद्धति जैसे संज्ञात्मक व्यवहार पद्धति से इलाज किया जाता है।

हम नहीं जानते कि क्या ये इलाज रेखांकित समस्या का समाधान करते हैं क्योंकि अब तक हमने इनकी पहचान नहीं की है। इसका मतलब है कि एसएसआरआई अवसाद रोधी दवाएं संभवत: कारगार नहीं होंगी, लेकिन सबूत इसके विपरीत बात करते हैं।

नियमित रूप से हम अवसाद तथा उसके उप स्वरूपों या ‘‘अवसाद’’ की और समझ की शुरुआत कर रहे हैं, जिसमें अधिक विशिष्ट प्रक्रिया और इलाज हो।

हमारी अवसाद और उसके इलाज के प्रति समझ गत एक सदी से बढ़ रही है और उसकी गति में कमी आने के संकेत नहीं हैं। अवसाद के कारणों की पहचान करना और उनका नया इलाज तलाशना मुश्किल है, लेकिन जरूरी है अगर हम वैश्विक आधार पर निशक्तता के सबसे सामान्य कारण से निपट सकें।

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