नयी दिल्ली, 11 अगस्त राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को कहा कि त्वरित संदेश और सोशल मीडिया के युग में प्रासंगिक बने रहने के लिए डाक विभाग को विकसित होना होगा। उन्होंने वित्तीय समावेशन के माध्यम से हाशिए पर रहने वाले समुदायों को सशक्त बनाने की इसकी रणनीतिक पहल की सराहना की।
राष्ट्रपति भारतीय डाक सेवा (2021 और 2022 बैच) के प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित कर रही थीं, जिन्होंने यहां राष्ट्रपति भवन में उनसे मुलाकात की। मुर्मू ने कहा कि डाक विभाग ने सरकारी सब्सिडी, कल्याण भुगतान और पेंशन प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
वित्तीय समावेशन में डाक विभाग की भूमिका की सराहना करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि विभाग ने वित्तीय अंतर को कम करने और उपेक्षित समुदायों को सशक्त बनाने के लिए रणनीतिक पहल की है। उन्होंने कहा कि डाकघरों के माध्यम से धन के निर्बाध वितरण से बिचौलियों पर निर्भरता कम हुई है और ‘लीकेज’ भी कम हुआ है।
डाक विभाग की 160 वर्ष की उल्लेखनीय यात्रा को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि यह राष्ट्र की सेवा के प्रतीक के रूप में खड़ा है। लगभग 1.60 लाख डाकघरों के व्यापक नेटवर्क के साथ यह दुनिया का सबसे बड़ा डाक नेटवर्क है। राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय डाक नेटवर्क एकीकृत रूप में कार्य करता है, जो हमारी संस्कृतियों और परंपराओं की विशाल श्रृंखला को एक सूत्र में बांधता है।
राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय डाक सेवा के अधिकारियों की भूमिका इस देश के लोगों की सेवा करने के इर्द-गिर्द घूमती है और इसलिए ग्राहक-केंद्रित दृष्टिकोण की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि त्वरित संदेश और सोशल मीडिया के युग में डाक विभाग को प्रासंगिक बने रहने के लिए विकसित होना होगा।
राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें यह जानकर खुशी हुई कि डाक विभाग डिजिटल परिदृश्य के अनुकूल अपनी सेवाओं को सक्रिय रूप से आधुनिक बना रहा है। उन्होंने कहा कि इस परिवर्तनकारी यात्रा में युवा प्रशिक्षु अधिकारियों के नए-नए विचार बहुमूल्य होंगे।
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