नयी दिल्ली, 27 मई दिल्ली उच्च न्यायालय ने तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों के शिविर पर 29 जनवरी को हुए कथित हमले की विशेष जांच दल (एसआईटी) से स्वतंत्र जांच कराने का अनुरोध करने वाली याचिका पर बृहस्पतिवार को केन्द्र और दिल्ली सरकार से जवाब मांगा।
केंद्र ने यह कहते हुए इस याचिका का विरोध किया कि यह ‘गलत मंशा’ पर आधारित है तथा स्वतंत्र एसआईटी जांच अवाछंनीय है।
लेकिन न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता ने केन्द्रीय गृह मंत्रालय, दिल्ली सरकार के गृह विभाग और अलीपुर थाने (जिसके अधिकार क्षेत्र में घटनास्थल आता है) को नोटिस जारी किया और उनसे याचिका पर अपना रुख स्पष्ट करने को कहा।
केंद्रीय गृह मंत्रालय, गृह विभाग और अलीपुर के थाना प्रभारी की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलीसीटर जनरल अमन लेखी ने अदालत से कहा कि याचिका में ‘केंद्र सरकार से स्वतंत्र’ अधिकारियों वाली एक एसआईटी गठित करने की मांग की जा रही है जो संभव नहीं है।
इस पर अदालत ने कहा कि विधि अधिकारी द्वारा दिये गये कारण, नोटिस नहीं भेजने का आधार नहीं हो सकते। ऐसा कहते हुए अदालत ने निर्देश दिया कि सुनवाई की अगली तारीख 26 जुलाई को संयुक्त पुलिस आयुक्त के हस्ताक्षर वाली स्थिति रिपोर्ट पेश की जाए।
याचिका में दावा किया गया है कि दिल्ली और हरियाण के बीच सिंघू बॉर्डर पर किसानों के शिविर पर 29 जनवरी को कुछ असामाजिक तत्वों ने वहां तैनात ‘‘ पुलिस कर्मियों की मदद से’’ हमला किया था।
उसमें यह भी दावा किया गया है कि 26 जनवरी की घटना के प्रतिशोध में शिविर पर यह हमला किया गया था। छब्बीस जनवरी को कुछ किसान गणतंत्र दिवस सुरक्षा घेरा तोड़कर लाल किले में घुस गये थे और उन्होंने वहां एक झंडा लगा दिया था।
इस याचिका के अनुसार शिविर पर हमले में आठ किसान घायल हुए थे।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि अलीपुर थाने में असामाजिक तत्वों और कथित दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ शिकायत की गई, लेकिन प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई।
याचिका में यह भी कहा गया कि केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई), भारत के प्रधान न्यायाधीश, राष्ट्रीय महिला आयोग और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से भी मामले की उचित जांच के लिए अनुरोध किया गया लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
याचिका में एसआईटी द्वारा मामले की स्वतंत्र जांच के अलावा, घटनास्थल पर लगे पुलिस कैमरों में कैद घटना की वीडियो फुटेज को संरक्षित रखने का अनुरोध भी किया गया है।
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