जरुरी जानकारी | बड़ी तेल मिलों की मांग से सरसों तेल-तिलहन में सुधार
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. देश की बड़ी तेल मिलों की मांग बढ़ने के कारण घरेलू तेल-तिलहन बाजार में बृहस्पतिवार को सरसों तेल-तिलहन के दाम सुधार के साथ बंद हुए। मलेशिया में सुधार से कच्चे पामतेल (सीपीओ) के दाम में भी सुधार रहा।
नयी दिल्ली, 26 जून देश की बड़ी तेल मिलों की मांग बढ़ने के कारण घरेलू तेल-तिलहन बाजार में बृहस्पतिवार को सरसों तेल-तिलहन के दाम सुधार के साथ बंद हुए। मलेशिया में सुधार से कच्चे पामतेल (सीपीओ) के दाम में भी सुधार रहा।
मिल वालों की कमजोर मांग से सोयाबीन तेल-तिलहन तथा पुनर्विक्रेता द्वारा पहले के ऑर्डर के स्टॉक को मिलवालों के मुकाबले नीचे दाम पर बेचने से पामोलीन तेल कीमतों में गिरावट आई। कमजोर मांग के बीच मूंगफली तेल-तिलहन और बिनौला तेल के भाव स्थिर रहे।
शिकॉगो एक्सचेंज में कल रात गिरावट थी और फिलहाल यहां सुधार चल रहा है। मलेशिया एक्सचेंज दोपहर 3.30 बजे सुधार के साथ बंद हुआ। शाम का कारोबार यहां बंद है। कल यहां छुट्टी है। अब सोमवार को यहां कारोबार होगा।
सूत्रों ने कहा कि बड़ी तेल मिलों की मांग बढ़ने के कारण सरसों तेल-तिलहन कीमतों में सुधार हुआ। सरसों का या तो किसानों के पास या फिर सरकार के पास स्टॉक है। हालांकि, मार्च-अप्रैल के महीने में जितनी आवक होनी चाहिये थी उतनी नहीं हुई तथा जो मिल वाले पहले 3-4 महीने का स्टॉक जमा कर लेते थे, उतना अधिक स्टॉक इस बार जमा नहीं किया जा सका है। अब भी किसान रोक-रोककर ही अपना माल ला रहे हैं। जिन किसानों ने एक बार सरसों का ऊंचा भाव पहले कभी देख लिया है, वह दोबारा नीचे आना नहीं चाहते।
उन्होंने कहा कि मलेशिया एक्सचेंज में सुधार रहने के कारण सीपीओ के दाम सुधार के साथ बंद हुए जबकि जिन रीसेलर ने पहले के आर्डर वाले पामोलीन का स्टॉक रखा है, वे उसे मिल वालों से कुछ कम दाम पर बेच रहे हैं जिस वजह से पामोलीन तेल कीमतों में गिरावट है।
सूत्रों ने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से काफी नीचा हाजिर दाम और मिल वालों की कमजोर मांग के कारण सोयाबीन तेल-तिलहन कीमतों में गिरावट रही। सोयाबीन से काफी मात्रा में निकलने वाले डी-आयल्ड केक (डीओसी) के जब तक देश में और निर्यात के दाम अच्छे नहीं मिलेंगे स्थिति विकट बनी रहेगी।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2025-26 के लिए सोयाबीन का एमएसपी 5,328 रुपये क्विंटल है जबकि मंडियों में सोयाबीन का भाव 4,100-4,200 रुपये क्विंटल के नीचे है। यहां सरकार की ओर से हर साल एमएसपी बढ़ाने की पहल किसी मुकाम पर जाती नहीं दिखती।
उन्होंने कहा कि मूंगफली की ग्रीष्मकालीन नमीयुक्त फसल के कमजोर दाम तथा बेहद कमजोर कामकाज के बीच मूंगफली तेल-तिलहन और बिनौला तेल के भाव पूर्वस्तर पर बने रहे।
तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:
सरसों तिलहन - 6,775-6,825 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली - 5,575-5,950 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 13,500 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली रिफाइंड तेल - 2,185-2,485 रुपये प्रति टिन।
सरसों तेल दादरी- 14,450 रुपये प्रति क्विंटल।
सरसों पक्की घानी- 2,525-2,625 रुपये प्रति टिन।
सरसों कच्ची घानी- 2,525-2,660 रुपये प्रति टिन।
सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 12,550 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 12,350 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 9,575 रुपये प्रति क्विंटल।
सीपीओ एक्स-कांडला- 10,630 रुपये प्रति क्विंटल।
बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 12,200 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 12,350 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन एक्स- कांडला- 11,300 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।
सोयाबीन दाना - 4,350-4,400 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन लूज- 4,050-4,150 रुपये प्रति क्विंटल।
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(The above story first appeared on LatestLY on Jun 26, 2025 08:28 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

