देश की खबरें | दिल्ली हिंसा : अदालत ने पुलिस को पिंजरा तोड़ कार्यकर्ता पर लगे आरोपों पर सूचना प्रसारित करने से रोका
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 27 जुलाई दिल्ली उच्च न्यायालय ने सीएए विरोधी प्रदर्शनों के दौरान शहर में हुई हिंसा के सिलसिले में गिरफ्तार ‘पिंजरा तोड़’ कार्यकर्ता देवांगना कलिथा के खिलाफ लगे आरोपों पर पुलिस को मामले में मुकदमा शुरू होने से पहले तक किसी तरह की सूचना प्रसारित करने से सोमवार को रोका।

वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए आदेश सुनाते हुए न्यायमूर्ति विभु बाखरु ने यह भी कहा कि मामले को लेकर दो जून को दिल्ली पुलिस द्वारा मीडिया को जारी प्रेस नोट को खारिज करने की कलिथा की याचिका को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

यह भी पढ़े | हिमाचल प्रदेश के चंबा में महसूस किए गए भूकंप के झटके, तीव्रता 3.1 मापी गई: 27 जुलाई 2020 की बड़ी खबरें और मुख्य समाचार LIVE.

अदालत ने यह आदेश जेएनयू छात्रा, कलिथा की याचिका पर पारित किया जिसमें उसने पुलिस द्वारा अपने खिलाफ कुछ साक्ष्यों को चयनात्मक तरीके से लीक करने का आरोप लगाया है।

पिंजरा तोड़ दिल्ली के विभिन्न कॉलेज की छात्राओं और पूर्व छात्रों का संगठन है।

यह भी पढ़े | मध्य प्रदेश: छतरपुर में बाइक और स्कॉर्पियो की भीषण टक्कर में आठ लोगों की मौत, सीएम शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर मृतक के परिवार वालों के लिए जताई संवेदना.

पिछले साल दिसंबर में संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान पुरानी दिल्ली के दरियागंज इलाके में हुई हिंसा से जुड़े एक मामले में, 23 मई को गिरफ्तार की गई कलिथा तिहाड़ जेल में बंद है।

उसके खिलाफ कुल तीन मामले दर्ज हैं जिसमें उत्तरपूर्वी दिल्ली में इस साल हुए दंगों से जुड़ा मामला भी है।

उत्तरपूर्वी दिल्ली में 24 फरवरी को सांप्रदायिक दंगे भड़क गए थे जब नागरिकता कानून के समर्थकों एवं विरोधियों के बीच हिंसा अनियंत्रित हो गई थी। इन दंगों में कम से कम 53 लोगों की मौत हो गई थी और करीब 200 लोग घायल हो गए थे।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)