नयी दिल्ली, नौ अगस्त दिल्ली विश्वविद्यालय ने भारत केंद्रित परिप्रेक्ष्य के जरिए जनजातीय प्रथाओं, संस्कृति, , धर्म, अर्थव्यवस्था, समानताओं और प्रकृति के साथ संबंधों की विविधता को समझने के उद्देश्य से जनजातीय अध्ययन केंद्र (सीटीएस) की स्थापना की घोषणा की।
विश्वविद्यालय ने विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर यह घोषणा की।
विश्वविद्यालय ने एक बयान में कहा कि यह जनजातीय अध्ययन केंद्र मौजूदा समय में और आने वाले भविष्य में जनजातीय समुदाय के संपूर्ण विकास और कल्याण से संबंधित समकालीन मुद्दों को हल करने और उनके जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में एक परिवर्तनकारी कदम है।
इस संबंध में एक शासी निकाय गठित कर दिया गया है, जिसके अध्यक्ष दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के निदेशक प्रोफेसर प्रकाश सिंह होंगे और उनके साथ कैंपस ऑफ ओपन लर्निंग की निदेशक शिक्षाविद प्रोफेसर पायल मागो, विधि संकाय के प्रोफेसर के. रत्नाबलि और भूगोल विभाग के प्रोफेसर वी. एस. नेगी सदस्य के रूप में काम करेंगे।
विश्वविद्यालय द्वारा जारी बयान के मुताबिक, दिल्ली विश्वविद्यालय के जनजातीय अध्ययन केंद्र को केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय आंध्र प्रदेश के कुलपति प्रोफेसर टीवी कट्टीमनी और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के जनजातीय अध्ययन संस्थान के निदेशक प्रोफेसर चंद्र मोहन परशीरा बाहरी विशेषज्ञ के तौर पर शैक्षणिक जानकारी प्रदान करेंगे।
विश्वविद्यालय के मुताबिक, ''यह जनजातीय अध्ययन केंद्र (सीटीएस) उन जनजातियों को सशक्त बनाने के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय के दृष्टिकोण का एक सटीक प्रमाण है, जो भारत की कुल आबादी में आठ प्रतिशत से अधिक की भागीदारी रखती हैं।''
विश्वविद्यालय ने मानव विज्ञान विभाग के प्रमुख, प्रोफेसर सौमेंद्र मोहन पटनायक को जनजातीय अध्ययन केंद्र के निदेशक के रूप में और मानव विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अविटोली जी. झिमो को संयुक्त निदेशक के रूप में नियुक्त किया है।
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