देश की खबरें | दिल्ली दंगा: नफरती भाषणों का आरोप लगाने वाली याचिकाओं पर आठ फरवरी से उच्च न्यायालय में सुनवाई

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि वह संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली के दंगों और नेताओं के कथित नफरत भरे भाषणों से संबंधित याचिकाओं पर आठ फरवरी से सुनवाई करेगा।

नयी दिल्ली, चार फरवरी दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि वह संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली के दंगों और नेताओं के कथित नफरत भरे भाषणों से संबंधित याचिकाओं पर आठ फरवरी से सुनवाई करेगा।

इन याचिकाओं पर पहले मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने सुनवाई की थी। लेकिन अब 28 जनवरी के प्रशासनिक आदेश के माध्यम से ये याचिकाएं न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी की पीठ को स्थानांतरित कर दी गई हैं।

न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल के नेतृत्व वाली पीठ ने कहा, ‘‘हम आठ फरवरी से सुनवाई शुरू करेंगे। जो मुद्दे खत्म हो चुके हैं और जो अभी भी बाकी हैं, उनका निपटारा करेंगे।’’

उच्च न्यायालय ने उल्लेख किया कि शीर्ष अदालत ने एक याचिका पर 17 दिसंबर 2021 के आदेश में इसे शीघ्रता से, मुख्यत: तीन महीने के भीतर निपटारा करने का आग्रह किया है जिसमें ऐसे नेताओं के खिलाफ उनके कथित घृणास्पद भाषणों के लिए प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध किया गया है, जिसके कारण पिछले साल उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगे हुए थे।

दिल्ली पुलिस का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिवक्ता रजत नायर ने कहा कि ज्यादातर मामलों में जांच पूरी हो चुकी है और आरोप पत्र दायर कर दिया गया है और एक या दो मामलों में आरोपियों को दोषी ठहराया गया है।

दिल्ली पुलिस ने 27 जनवरी को दाखिल एक हलफनामे में उच्च न्यायालय को बताया कि अधिकारियों ने बिना किसी डर या पक्षपात के और प्रभावित क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था की स्थिति को नियंत्रित करने तथा दंगों के दौरान लोगों की संपत्ति, जीवन बचाने के लिए पेशेवर तरीके से तुरंत, सतर्कता और प्रभावी ढंग से काम किया है।

पुलिस ने उच्च न्यायालय को यह भी सूचित किया है कि 758 मामलों में से 367 में आरोप पत्र दाखिल किए गए हैं, 384 में जांच लंबित है, तीन में अदालतों में मामलों को बंद करने के लिए ‘क्लोजर रिपोर्ट’ दाखिल की गई है और चार को उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया है।

वकील अमित महाजन और रजत नायर के जरिए दाखिल हलफनामा अदालत के 25 नवंबर 2021 के आदेश के मद्देनजर दायर किया गया, जिसमें पुलिस को 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के दौरान आपराधिक मामलों की ताजा स्थिति के बारे में बताने का आदेश दिया गया था।

दंगों में 53 लोग मारे गए थे और 700 घायल हो गए।

अदालत कई याचिकाओं पर विचार कर रही है जिनमें आरोप लगाया गया है कि राहुल गांधी, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी वाद्रा सहित कांग्रेस नेताओं के साथ-साथ आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया और अमानतुल्ला खान तथा ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिममीन (एआईएमआईएम) के विधायक वारिस पठान ने नफरत भरे भाषण दिए।

अदालत दिल्ली निवासी अजय गौतम की एक जनहित याचिका पर भी सुनवाई कर रही है जिसमें हिंसा की गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) कानून (यूएपीए) के तहत राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) से जांच कराने का अनुरोध किया गया है।

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