देश की खबरें | दिल्ली दंगे : अदालत ने दंगा और आगजनी के तीन आरोपियों को बरी किया

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नयी दिल्ली, 24 जनवरी राष्ट्रीय राजधानी एक स्थानीय अदालत ने 2020 के उत्तर पूर्व दिल्ली दंगों से संबंधित एक मामले में तीन लोगों को दंगे और आगजनी के आरोपों से बरी करते हुए कहा है कि केवल दो पुलिसकर्मियों की गवाही पर भरोसा करना ‘सुरक्षित नहीं’ था, जिन्होंने आरोपियों की पहचान की थी।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुलस्त्य प्रमाचला आरोपियों- अकरम, मोहम्मद फुरकान और मोहम्मद इरशाद के खिलाफ एक मामले की सुनवाई कर रहे थे। इन आरोपियों पर 24 फरवरी, 2020 को शिव विहार, तिराहा के पास एक पुस्तक की दुकान में आग लगाने वाली दंगाई भीड़ का हिस्सा होने का आरोप था।

न्यायाधीश ने मंगलवार को सुनाए गये फैसले में कहा, ‘‘मुझे लगता है कि अभियोजन पक्ष के गवाह पीडब्ल्यू-दो (कांस्टेबल पवन कुमार) और पीडब्ल्यू-सात (कांस्टेबल अमित) की इस गवाही पर भरोसा करना सुरक्षित नहीं है कि तीनों आरोपी भीड़ का हिस्सा थे।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि इस मामले में तीनों के खिलाफ लगाए गए आरोप उचित संदेह से परे साबित नहीं हुए हैं। इसलिए, आरोपी व्यक्तियों को संबंधित दुकान में हुई घटना से संबंधित आरोपों से बरी किया जाता है।’’

अदालत ने कहा, हालांकि यह साबित करने के लिए विश्वसनीय सबूत थे कि एक दंगाई भीड़ ने बर्बरता और आगजनी की थी, लेकिन दोनों कांस्टेबल के बयानों में कुछ विसंगतियां थीं।

आदेश में कहा गया है कि घटना के तुरंत बाद, दोनों ने आरोपी व्यक्तियों की पहचान करने के संबंध में कोई बयान या दैनिक डायरी (डीडी) प्रविष्टि नहीं दी। अदालत ने कहा कि दोनों कांस्टेबल ने छह मार्च, 2020 को एक वीडियो क्लिप देखने के बाद आरोपी व्यक्तियों की पहचान की थी, लेकिन संबंधित वीडियो क्लिप के बारे में कोई स्पष्टता नहीं थी।

अदालत ने कहा कि यद्यपि दोनों पुलिसकर्मियों ने दावा किया था कि वे आरोपी व्यक्तियों और घटनास्थल से पहले के उनके कार्यस्थलों को जानते थे, लेकिन उन्होंने जांच अधिकारी (आईओ) को उन स्थानों तक ले जाकर वहां छापा मारने के अभियान में साथ नहीं दिया, जहां वे हो सकते थे।

राजधानी के दयालपुर थाने की पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था।

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