नयी दिल्ली, 11 अगस्त दिल्ली पुलिस ने उच्च न्यायालय को बताया कि राष्ट्रीय राजधानी के हर जिले में अपराध के उभरते रुझानों से निपटने के लिए 15 साइबर पुलिस थाने स्थापित किये गये हैं।
दिल्ली पुलिस ने एक जनहित याचिका के जवाब में कहा कि साइबर अपराध की शिकायत ऑनलाइन माध्यम और चौबीस घंटे काम करने वाले नंबर- ‘1930’ के जरिये आसानी से दर्ज कराई जा सकती है।
केंद्र ने दिल्ली उच्च न्यायालय को दिये गये अपने जवाब में कहा कि केंद्रशासित प्रदेश उचित जागरूकता कार्यक्रम संचालित कर सकते हैं, ताकि साइबर कानून पर अमल के बारे लोगों में जागरूकता फैलाई जा सके।
केंद्र का यह जवाब उस जनहित याचिका पर आया, जिसमें किसी कथित साइबर अपराध के लिए प्राथमिकी दर्ज करने के वास्ते शिकायत किए जाने पर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों को लागू करने की मांग की गई थी।
दिल्ली पुलिस ने तथ्यों के आधार पर कहा कि कुछ मामले केवल सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम के तहत दर्ज किए जाते हैं, और अन्य मामलों में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के प्रासंगिक प्रावधान भी लागू किए जाते हैं।
पुलिस ने नफरती भाषण, पीछा करने, आतंकवादी एजेंडे के ऑनलाइन प्रसार के लिए भर्ती, भ्रामक संदेश भेजने आदि का जिक्र करते हुए कहा कि विभिन्न साइबर अपराधों के मामलों से निपटने के लिए भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) जैसे परंपरागत कानून के प्रावधानों के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है।
दिल्ली सरकार के स्थायी वकील संतोष कुमार त्रिपाठी के माध्यम से दायर जवाब में कहा गया है, ‘‘यहां यह उल्लेख करना प्रासंगिक है कि आईटी अधिनियम के तहत अधिकांश अपराध जमानती हैं, जबकि आईपीसी में कड़ी सजा के प्रावधान हैं। दिल्ली पुलिस उचित कार्रवाई करने से पहले प्रत्येक मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर गंभीरता से विचार करती है।’’
इसमें कहा गया कि साइबर अपराध के उभरते रुझानों से निपटने के लिए 15 साइबर पुलिस थाने दिल्ली के हर जिले में स्थापित किये गये हैं।
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